ग्राम पंचायत चुनाव : समीकरण बदला तो ओबीसी से किया निकाह, अब नई नवेली दुल्हन दावेदार

देवेंद्र पुरोहित, देवरिया | उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं। चौपालों पर बैठकर लोग चुनाव को लेकर चर्चा करने लगे हैं। ग्राम पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक लोग अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। इसके लिए वह अभी से मतदाताओं के बीच जा रहे हैं। सबसे ज्यादा ग्राम प्रधान और जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव को लेकर सरगर्मी है। लेकिन आरक्षण फार्मूले को लेकर प्रत्याशियों की उलझनें बढ़ गई हैं। आरक्षण नए सिरे से हो या चक्रानुक्रम, यह फैसला अब सरकार और कोर्ट के पास चला गया हैं। ऐसे में प्रधान बनने का सपना संजोए दावेदार हर पैंतरा आजमाने को तैयार हैं। ताजा मामला यूपी के देवरिया जनपद का है। यहां एक सामान्य वर्ग के दावेदार के चुनाव लड़ने की राह को जब आरक्षण के कांटे ने रोकना चाहा तो उसने अपने बेटे का निकाह ओबीसी वर्ग की एक लड़की से करा दी और चुनाव की तैयारी में जुट गया है। दरअसल सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई थी। इस चुनावी शादी की चर्चा पूरे इलाके में ज़ोर शोर से है।

यह पूरा मामला देवरिया जिले के तरकुलवा ब्लॉक के नारायणपुर गांव का है। यह सीट साल 2005 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। पिछली सूची में यह गांव सामान्य जाति के लिए आरक्षित था। गांव में रहने वाले सरफराज सामान्य वर्ग में आते हैं। सरफराज ने पिछला चुनाव लड़ा था और 27 वोटों से चुनाव हार गए थे।


लेकिन इस बार उनकी चुनाव लड़ने की तैयारी को आरक्षण से झटका लग गया। लेकिन चुनाव लड़ने की ठान बैठे सरफराज ने एक नया फार्मूला निकाल लिया। उन्होंने अपने सिराज का निकाह पिछड़ी जाति की युवती सलमा खातून अंसारी से करा दिया है। अब वह नव विवाहिता बहू को प्रधानी का चुनाव लड़ाने की तैयारी में जुट गए हैं। वहीं, सिराज ने कहा कि मैं पढ़ा लिखा नौजवान हूं। जाति में विश्वास नहीं करता। मेरी पत्नी अब चुनाव लड़ेगी।

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