नील गायें बनी किसानों की शत्रु, सरकार नहीं दे रही ध्यान

देवरिया। जिले में ही नहीं समूचे प्रदेश में नीलगायें किसानों की शत्रु बनी हैं।सरकार नीलगायों पर प्रतिबंध नहीं लगा रही है। नीलगायों की प्रजजन क्षमता इतनी है कि हर वर्ष चौगुने रफ्तार से उनकी संख्या बढ़ रही है। ऊपर से तुक्का यह कि चाहे कितना भी नुकसान हो जाय हम मार नहीं सकते।किसानों की गाढ़ी कमाई उनकी आंखों के सामने चट्ट हो रही।न वन विभाग को चिंता न कृषि विभाग को फिक्र। और तो और मुख्यमंत्री भी इस मामले में उदासीन हैं।
किसानों की उपज ही उनके खून-पसीने की कमाई होती है और इसी कमाई को ऋषिकेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवर रौंद रहे हैं। प्रतिवर्ष फसल पर कहर ढाह रहे जंगली जानवरों के कारण किसान खेती-बाड़ी छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
यह क्षेत्र कृषि प्रधान क्षेत्र हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इन क्षेत्रों में लगातार किसान खेतीबाड़ी से विमुख होते जा रहे हैं। इसका बड़ा कारण किसानों की फसल को जंगली जानवरों से हो रही क्षति है। यह क्षेत्र लंबे समय से जंगली जानवरों के आतंक के चलते प्रभावित हैं। यहां नीलगाय, आवारा पशु, सुअर, बंदर और लंगूर किसानों के दुश्मन बने हुए हैं।

किसी भी सीजन की फसल जंगली जानवरों से सुरक्षित नहीं रह पाती। आलम यह है कि जंगली जानवरों के उत्पात के चलते किसान खेती बाड़ी छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं, जो किसान खेती कर भी रहे हैं उन्हें अपनी फसलों की सुरक्षा भारी पड़ रही है। जंगली जानवर कहीं ना कहीं से कृषि क्षेत्र में घुसकर नुकसान पहुंचा जाते हैं। वन विभाग है कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कागजों में ही योजनाएं तैयार करता है।
सरकार किसानों के प्रति असंवेदनशील है। किसान बर्बाद हो रहा। अन्न उसकी आँखों के सामने खत्म हो रहा। किसानों की उपज बर्बाद हो रही। उपज पर बुरा असर पड़ रहा। केवल सरकारी कागजों में वन्य जीवों के बन्ध्याकरण और पकड़ कर वनों में छोड़ने की योजनाएं चलती हैं। जमीनी धरातल पर यह योजनाएं हवा-हवाई हैं।

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