जर्जर भवन, गंदगी का अंबार, यहीं है देवरिया बस स्टैंड की पहचान

देवेन्द्र पुरोहित, देवरिया | सांसद, विधायक जनता की  सुविधाओं से पहले अपनी सुविधा दुरुस्त करने में मगशूल रहते है, यह सिर्फ कहावत ही नही बल्कि इसका जीता जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश का देवरिया बस स्टैंड है, जिसकी पहचान जर्जर भवन, गंदगी का अंबार हैं . प्रति दिन लाखों रुपये कमा कर देने वाले जिला मुख्यालय के रोडवेज बस स्टैंड पर यात्री सुविधा पूरी तरह से नदारद है . वैसे तो यूपी रोडवेज की बसों में यात्रा कर रहे है तो आपका गंतव्य तक पहुचना बेहद संदिग्ध है, क्या पता कब कहाँ और कैसे आपकी बस चलने से मना करदे, परिचालक आधा अधूरा टिकट देकर पूरा किराया वसूल ले कुछ कह नहीं सकते .

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भवन की दीवारे अपना वजूद जाने कब का खो चुकी है और इस इंतज़ार में है कि कब कोई यात्री हमारे नीचे आये और उनकी मौत का कारण बने जिससे अखबार में जगह मिले और अफसर, नेताओं की आँख खुले . बारिश में छतों से टपकता पानी किसी हिल स्टेशन के झरने सा प्रतीत होता हैं . और तो और शाम ढलते ही मधुशाला प्रेमियों तथा मनचलों का जमावड़ा शुरू होता है जो की किसी से मारपीट और नोक-झोक पर जा कर खत्म होता हैं.

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इस संबंध में अधिकारीयों का कहना है कि भवन के लिए प्रस्ताव कई बार बनाकर भेजा गया है। लेकिन कब तक बनेगा कुछ कह नहीं सकते . शासन प्रशासन के लोग यहीं खड़े होकर आमजन पर कर, और दंड लादने में मगशूल है लेकिन जो जिम्मेदारी सरकार की है उस से लगातार मुँह मोड़ा जा रहा है, देखना यह होगा कि सरकारी उपेक्षा का शिकार देवरिया का यह बस स्टैंड जिम्मेदारो की नजर खींचने में कब कामयाब होगा .

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