हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की लखनऊ में दिनदहाड़े हत्या

उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था दिन प्रति दिन विकराल रूप लेती जा रही है। आलम ये है कि पूरे प्रदेश में ऐसा कोई दिन नहीं बीत रहा जिसमें हत्या, लूट, डकैती न हो । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का तथाकथित ‘रामराज्य’ केवल कहने के लिए रह गया है । ताजा मामला लखनऊ का है जहां हिंदू समाज पार्टी के नेता और हिंदू महासभा के पूर्व नेता कमलेश तिवारी की दिन दहाड़े हत्या कर दी गई। खबरों के मुताबिक, हमलावर मिठाई का डिब्बा सौंपने के बहाने खुशीर्द बाग इलाके में स्थित उनके कायार्लय में घुसे थे। अंदर घुसते ही हमलावरों ने डब्बा खोला उसमें से बंदूक और चाकू से दिन दहाड़े तिवारी को मार कर फरार हो गए। उन्हें तत्काल ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। कमलेश तिवारी के गले को किसी धारदार हथियार से रेता गया है, साथ ही सीने पर तीन गोली के निशान भी  हैं। बता दें कि, प्रदेश के सीतापुर जिले के रहने वाले कमलेश तिवारी लगातार विवादों में रहते थे। इसके चलते उन्हें 2 बार गिरफ्तार भी किया गया था तथा उनपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लग चुका था । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन पर से रासुका हटा दिया था। फ़िलहाल लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने कहा कि हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है। घटना स्थल से हत्या के लिए इस्तेमाल किया गया तमंचा और कारतूस बरामद किए गए हैं। प्रथमदृष्टया किसी व्यक्तिगत रंजिश की बात लग रही है। यहां पर आरोपी उनसे मिलने आए थे। परिचित भी लग रहे हैं, जिस तरह से उनका आना हुआ। चाय पीने के बाद घटना हुई है। किसी परिचित के द्वारा रंजिश में घटना को अंजाम देने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इस माह दक्षिणपंथी नेता की हुई यह चौथी हत्या है।

इसके पहले देवबंद में आठ अक्टूबर को भाजपा के नेता चौधरी यशपाल सिंह की भी इसी तरह से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बस्ती में 10 अक्टूबर को एक अन्य भाजपा नेता और पूर्व में छात्र नेता रहे कबीर तिवारी की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, भाजपा पार्षद धरा सिंह  को 13 अक्टूबर को शनिवार सुबह सहारनपुर के देवबंद में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी।

कमलेश के समर्थकों का कहना है कि उनकी जान को लगातार खतरा था। बार-बार फोन पर धमकियां मिल रही थीं। वहीं, कई बार हमले की कोशिश भी हो चुकी थी। इसके बावजूद राज्य सरकार ने उन्हें सिर्फ एक गनर दिया था, जो भी मौके पर मौजूद नहीं था। समर्थकों का दावा है कि कमलेश को वाई कैटिगरी की सुरक्षा देने की बात भी कही गई थी, लेकिन इसकी फाइल 3 साल से सरकारी दफ्तरों में अटकी रही।

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