लल्लू-पंजू नहीं हैं अजय कुमार:एन डी देहाती

कांग्रेस के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू

देवरिया। कांग्रेस के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के बारे में अपनी बेबाक टिप्पड़ी करते हुए भोजपुरी व्यंग्यकार एन डी देहाती ने कहा कि लल्लू -पंजू नहीं हैं अजय कुमार। लल्लू उनका उपनाम है लेकिन वे राजनीति में लल्लू नहीं हैं। पंजा उनका निशान है लेकिन वे पंजू नहीं हैं। उन्होंने माटी की परिपाटी समझा है और कांग्रेस ऐसे बड़े दल को माटी का महत्व समझा कर उस कुर्सी पर काबिज हुए हैं जहाँ राज बब्बर, निर्मल खत्री व सलमान खुर्शीद जैसे बड़े नेता बैठते थे।
छात्र राजनिति की उपज अजय ने जीवन में बहुत संघर्ष किया। 2007 में जब पहली बार विधान सभा का चुनाव निर्दल लड़े तो जमानत जब्त हो गयी। वे न निराश हुए न हताश हुए। जब 2012 में कांग्रेस ने टिकट दिया तो उन्होंने भाजपा के नंदकिशोर मिश्र को तमकुही राज के मैदान में पटखनी देकर लखनऊ विधान सभा पहुंच गए। 2017 में जब देश-प्रदेश में भाजपा व भगवा का परचम लहर रहा था इस बन्दे का बाल बांका नहीं हुआ। अजय ने दुबारा कांग्रेस का तिरंगा लहरा कर यह दिखा दिया कि पंजे में कितनी ताकत है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालने के लिए अजय कुमार लल्लू शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे। जमीनी और साधारण कार्यकर्ता की अपनी छवि को साथ लेकर पहुंचे। चाहते तो एक से एक लग्जरी गाड़ियां मिल जातीं लेकिन बन्दा गोरखपुर से परिवहन की बस में यात्रा कर अपनी सादगी का परिचय दिया। बड़े ओहदे पर जाने के बाद लोग बड़ी बड़ी हांकते हैं लेकिन अजय ने अपनी गरीबी, कर्जदारी, व किये गए छोटे व तुच्छ कार्यों को भी मीडिया के समक्ष रखकर यह साबित कर दिया कि हम स्वांग नहीं सच के साथ हैं। जब वे पत्रकारों को बता रहे थे- “पिता जी कर्जदार थे, लोग दरवाजे पर आकर गालियां देते थे, हमने नमक बेचा, खाद बेची, सिनेमा हॉल में टिकट तक ब्लैक किए। लोंगो के कर्ज वापस किये।मेहनत मजदूरी की। बहुत संघर्षों के साथ जीवन जिया। ”
वास्तव में अजय अब लल्लू पंजू नहीं राजनीति के कुशल खिलाड़ी बन चुके हैं। वर्ष 2022 में कांग्रेस को वे कितनी सफलता दिला पाएंगे यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने पर कांग्रेस अंगड़ाई जरूर ले रही है।

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रिपोर्ट: पत्रकार पुरुषोत्तम सिंह ने वरिष्ठ पत्रकार व भोजपुरी व्यंग्यकार एन डी देहाती से बातचीत की उसी के अंश

 

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