विदेश में नौकरी का सपना दिखाकर 450 लोगों से 2.30 करोड़ की ठगी का आरोप, देवरिया में जांच तेज

देवरिया में विदेश नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 450 लोगों से 2.30 करोड़ रुपये लेने का आरोप

देवरिया। विदेश में नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना देख रहे सैकड़ों युवाओं के साथ कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद देवरिया में पुलिस जांच तेज हो गई है। शिकायतकर्ता के आरोप के मुताबिक, शहर के सीसी रोड स्थित त्रिपाठी कॉम्प्लेक्स में संचालित यूनिक मैनेजमेंट सर्विसेस के जरिए इंडोनेशिया और सिंगापुर में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर करीब 450 लोगों से लगभग 2.30 करोड़ रुपये लिए गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामले की शुरुआत उन युवाओं की शिकायतों से हुई, जिन्होंने विदेश जाने के लिए इस कार्यालय से संपर्क किया था। शिकायतकर्ता राजू पटेल, निवासी हरपुर निजाम, थाना तरकुलवा, के अनुसार विज्ञापन के माध्यम से उन्हें विदेश में नौकरी के अवसर की जानकारी मिली थी। इसके बाद वह अन्य लोगों के साथ देवरिया शहर स्थित कार्यालय पहुंचे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नौकरी और विदेश भेजने की प्रक्रिया के नाम पर अलग-अलग लोगों से रकम ली गई।

शिकायत के मुताबिक, कुछ युवाओं से नौकरी के लिए रकम के अलावा मेडिकल जांच के नाम पर भी पैसे लिए गए। एक मामले में करीब तीन लाख रुपये मेडिकल प्रक्रिया के नाम पर लिए जाने का आरोप है। पुलिस को दी गई शिकायत में कई अन्य लोगों के नाम और उनके द्वारा जमा की गई रकम का विवरण भी उपलब्ध कराया गया है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि करीब 450 लोगों से कुल लगभग 2.30 करोड़ रुपये लिए गए।

बैंक खातों में रकम जमा कराने का आरोप

शिकायत में यूनिक मैनेजमेंट सर्विसेस के कर्मचारी आशीष कुमार के बैंक खाते में रकम जमा कराए जाने का भी उल्लेख है। इसके अलावा त्रिपाठी कॉम्प्लेक्स के मकान मालिक गजानंद त्रिपाठी और गायत्री डायग्नोसिस सेंटर के कर्मचारियों पर भी शिकायत में आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

यह भी देखें  देवरिया में बसपा ब्राहम्ण भाई चारा के जिला संयोजक ने दिया इस्तीफा

पुलिस ने इस मामले में आशीष कुमार, गजानंद त्रिपाठी और गायत्री डायग्नोसिस सेंटर के कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की दो टीमें लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच सभी संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।

कंपनी के लाइसेंस पर भी जांच

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विदेश में नौकरी दिलाने का दावा करने वाली कंपनी के पास इसके लिए वैध लाइसेंस था या नहीं। पुलिस के अनुसार अभी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है। जांच टीम कंपनी के पंजीकरण, उसके दस्तावेजों, विदेश की कंपनियों से कथित संपर्क और लोगों से लिए गए पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।

इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि जिन लोगों से पैसे लिए गए, उन्हें वास्तव में नियुक्ति पत्र या वीजा उपलब्ध कराया गया था या नहीं। रकम किन बैंक खातों में पहुंची और उसका आगे कहां इस्तेमाल हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस ने अभी इन सवालों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

पहले भी सामने आया था युवाओं की शिकायत का मामला

विदेश भेजने के नाम पर ठगी से जुड़ा एक अन्य मामला भी हाल में सामने आया था। उसमें देवरिया, कुशीनगर और बिहार के 200 से अधिक युवाओं ने इंडोनेशिया और सिंगापुर भेजने के नाम पर रकम लिए जाने की शिकायत की थी। युवाओं ने प्रशासन से रुपये और पासपोर्ट वापस कराने तथा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

यह भी देखें  देवरिया जिले में 1500 शौचालय अपूर्ण, स्वछता मिशन का कबाड़ा

ऐसे मामलों ने विदेश में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं और उनके परिवारों के सामने एजेंटों की विश्वसनीयता जांचने का सवाल खड़ा किया है। हालांकि वर्तमान मामले में कितने लोग वास्तव में ठगी के शिकार हुए और कुल कितनी रकम गई, इसका अंतिम आंकड़ा पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं।

About Author

Leave a Reply

You may have missed

error: Content is protected !!