देवरिया। अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के आह्वान पर शनिवार को जिले की पांचों तहसीलों में लेखपालों ने काम बंद कर धरना-प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले धरने के दौरान लेखपालों ने शासन से लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान कराने की मांग उठाई। धरने के बाद संबंधित एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
लेखपाल संघ का आंदोलन 22 सितंबर से चरणबद्ध तरीके से चल रहा है। आंदोलन के पहले चरण में लेखपालों ने अतिरिक्त क्षेत्र का बस्ता कानूनगो कार्यालय में जमा किया था। शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार करते हुए तहसील मुख्यालयों पर धरना दिया गया।
वर्षों से लंबित मांगों को लेकर नाराजगी
लेखपालों की प्रमुख मांगों में प्रारंभिक वेतनमान और ग्रेड-पे से जुड़ी विसंगतियों को दूर करना, अंतर मंडलीय स्थानांतरण की व्यवस्था शुरू करना तथा लंबे समय से रुकी पदोन्नति सूची जारी करना शामिल है। इसके अलावा 16 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले लेखपालों के भत्ते में बढ़ोतरी, नवनियुक्त लेखपालों की विभागीय परीक्षा का परिणाम घोषित करने और उन्हें स्थायी करने की मांग भी उठाई गई है।
लेखपालों का कहना है कि उनके मूल कार्यों के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी लगातार बढ़ रही हैं। संघ ने लेखपालों को पटल सहायक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक जैसे अतिरिक्त कार्यों से मुक्त करने की मांग भी रखी है।
8 अक्टूबर से प्रमाणपत्र और फार्मर रजिस्ट्री के काम पर असर
आंदोलन की अगली कड़ी में 8 अक्टूबर से आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र, वरासत तथा फार्मर रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों के बहिष्कार की घोषणा की गई है। इससे इन सेवाओं के लिए लेखपालों पर निर्भर ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
संघ की घोषित आंदोलन रणनीति के अनुसार 10 अक्टूबर को थाना दिवस में काली पट्टी बांधकर काम करने, 12 अक्टूबर को रक्तदान शिविर लगाने और 14 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर बाइक रैली निकालने की योजना है। 17 अक्टूबर को तहसील मुख्यालयों पर संपूर्ण कार्य बहिष्कार और 24 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है।
लेखपाल संघ ने मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे भी जारी रखने की चेतावनी दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में राजस्व विभाग से जुड़े प्रमाणपत्र, वरासत और किसान संबंधी कार्यों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।