पितृ पक्ष में किस तिथि को किसका श्राद्ध? आचार्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी ने बताए विशेष नियम

पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियों से जुड़े विशेष नियमों की जानकारी देते आचार्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी

पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियों से जुड़े विशेष नियमों की जानकारी देते आचार्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी

पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियों से जुड़े विशेष नियम

पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियों से जुड़े विशेष नियमों की जानकारी देते आचार्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी
पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियों से जुड़े विशेष नियमों की जानकारी देते आचार्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी

पितृ पक्ष में पूर्वजों के श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व माना गया है। सामान्य रूप से जिस तिथि को व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि को उसका श्राद्ध किया जाता है। हालांकि शास्त्रों में कुछ विशेष परिस्थितियों में अलग तिथियों पर श्राद्ध करने के नियम बताए गए हैं। आचार्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी ने पितृ पक्ष में श्राद्ध से जुड़े इन विशेष नियमों की जानकारी दी है।
आचार्य के अनुसार, सौभाग्यवती स्त्री का निधन किसी भी तिथि में हुआ हो, उसका श्राद्ध नवमी तिथि को करने का विधान बताया गया है। इसी तरह शस्त्र, दुर्घटना, अग्नि, विष या बिजली से मृत्यु होने की स्थिति में व्यक्ति का श्राद्ध किसी भी मृत्यु तिथि पर न करके चतुर्दशी तिथि को करने की परंपरा बताई गई है।
उन्होंने बताया कि संन्यासी, वैष्णव और यति का श्राद्ध उनकी मृत्यु की तिथि की परवाह किए बिना द्वादशी तिथि को किया जाता है। वहीं चतुर्दशी तिथि को सामान्य मृत्यु होने पर श्राद्ध अमावस्या को करने का नियम बताया गया है।
आचार्य के मुताबिक पूर्णिमा तिथि में मृत्यु होने पर श्राद्ध द्वादशी अथवा अमावस्या को किया जा सकता है। वहीं एकादशी तिथि में मृत्यु को प्राप्त स्मार्त जनों के लिए एकादशी तिथि में ही श्राद्ध करने का विधान बताया गया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पितृ पक्ष में पार्वण श्राद्ध किया जाना चाहिए। ये नियम विशेष रूप से महालया पितृ पक्ष के संदर्भ में बताए गए हैं। जबकि वार्षिक श्राद्ध, एकोदिष्ट आदि श्राद्ध के लिए व्यक्ति की मृत्यु की तिथि को ही आधार माना जाता है।
आचार्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करते समय तिथि और परंपरा का ध्यान रखना आवश्यक है। श्रद्धालुओं को अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार विधि-विधान से श्राद्ध एवं तर्पण करना चाहिए।

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