देवरिया। सुहाग, प्रेम और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक करवा चौथ का पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। सुबह सरगी ग्रहण करने से शुरू होने वाला यह व्रत रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद पूरा किया जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार के कुछ हिस्सों, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सहित देश के कई क्षेत्रों में इस पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
करवा चौथ 2026: कब है व्रत और क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। देवरिया के लिए द्रिक पंचांग में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:15 बजे से 6:32 बजे तक बताया गया है। वहीं, चंद्रोदय का समय रात लगभग 7:55 बजे दिया गया है।
- पर्व: करवा चौथ
- दिन: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
- पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:15 से 6:32 बजे तक
- चंद्रोदय का अनुमानित समय: रात 7:55 बजे
- चतुर्थी तिथि: 29 अक्टूबर को रात लगभग 10:09 बजे तक
ये समय देवरिया के स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं। मौसम, स्थानीय परिस्थितियों और पंचांग की गणना के अनुसार चंद्रमा दिखाई देने के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले स्थानीय चंद्रोदय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
क्यों मनाया जाता है करवा चौथ?
करवा चौथ को पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक एकता का प्रतीक माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता से अपने पति की लंबी आयु तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
धार्मिक परंपराओं में माता पार्वती को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से करवा चौथ की पूजा में शिव-पार्वती की आराधना का विशेष महत्व है। समय के साथ इस पर्व का स्वरूप भी बदला है। आज कई परिवारों में पति भी अपनी पत्नी के स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से व्रत रखते हैं। इस तरह यह पर्व पारस्परिक प्रेम और साथ निभाने के संकल्प का प्रतीक बन गया है।
कैसे रखा जाता है करवा चौथ का व्रत? 
करवा चौथ की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा से होती है। आमतौर पर सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। इसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। सरगी ग्रहण करने के बाद महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं।
परंपरागत रूप से कई महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं, यानी भोजन और पानी ग्रहण नहीं करतीं। हालांकि, व्रत रखने की रीति परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
शाम को महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करती हैं। पूजा की थाली में दीपक, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई, फल और जल से भरा करवा रखा जाता है। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है। कई जगह महिलाएं समूह में बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और परंपरा के अनुसार पूजा की थालियों का आदान-प्रदान करती हैं।
चांद देखकर कैसे खोला जाता है व्रत?
करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। चंद्रोदय होने पर महिलाएं चंद्रमा को जल अर्पित करती हैं, जिसे अर्घ्य देना कहा जाता है। कई परिवारों में महिलाएं छलनी से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं।
इसके बाद पति के हाथ से जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है। परिवार के सदस्य इस अवसर पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और साथ में भोजन करते हैं। हालांकि, पूजा की कुछ विधियां स्थानीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती हैं।
करवा चौथ की कथा का क्या है महत्व?
करवा चौथ पर व्रत कथा सुनने की परंपरा प्रचलित है। प्रचलित कथाओं में वीरावती की कथा प्रमुख है। मान्यता के अनुसार, वीरावती ने अपने पति की लंबी आयु की कामना से व्रत रखा था। कथा में भाइयों द्वारा बहन का व्रत खुलवाने के लिए चंद्रमा निकलने का भ्रम पैदा करने का प्रसंग आता है। बाद में वीरावती को अपनी भूल का एहसास होता है और वह श्रद्धापूर्वक व्रत की परंपरा पूरी करती है।
यह कथा धार्मिक लोकपरंपरा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य श्रद्धा, धैर्य और संकल्प के महत्व को समझाना है। अलग-अलग क्षेत्रों में करवा चौथ की कथाओं के विभिन्न रूप भी सुनाए जाते हैं।
करवा चौथ में करवे का क्या है महत्व?
करवा चौथ के नाम में शामिल ‘करवा’ मिट्टी के उस पात्र को कहा जाता है, जिसमें जल रखा जाता है। पूजा के दौरान इसी पात्र से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। ‘चौथ’ का संबंध चतुर्थी तिथि से है। इस पर्व को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।
करवा केवल पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि पारंपरिक धार्मिक रीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई स्थानों पर करवे का आदान-प्रदान और दान करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
व्रत रखते समय सेहत का भी रखें ध्यान
करवा चौथ आस्था और परंपरा से जुड़ा पर्व है, लेकिन व्रत के दौरान स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं, मधुमेह से पीड़ित लोगों, नियमित दवा लेने वालों या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। कमजोरी, चक्कर या अस्वस्थता महसूस होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है।
करवा चौथ का संदेश केवल उपवास तक सीमित नहीं है। यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, सम्मान, विश्वास और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ निभाने की भावना को भी मजबूत करता है।
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