RBI गवर्नर ने दी चेतावनी- डिजिटल अरेस्ट स्कैम से सावधान रहें, घबराकर पैसे न गंवाएं

उदयपुर, 1 नवंबर 2025 (संपादकीय टीम, न्यूज़वाला) – भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने उदयपुर में आयोजित एक आर्थिक समिट के दौरान लोगों को डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि साइबर ठग फोन पर पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और पैसे ऐंठते हैं। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं होती, इसलिए घबराहट में कोई लेन-देन न करें। यह बयान राजस्थान में बढ़ते साइबर क्राइम के बीच आया है, जहां हाल ही में शादी के कार्ड जैसे फर्जी मैसेज से कई लोगों के फोन हैक हो चुके हैं। RBI ने इस मौके पर एक एडवाइजरी भी जारी की है।

उदयपुर के एक प्रमुख होटल में हुई इस समिट में मल्होत्रा ने बताया कि ठग व्हाट्सएप या फोन कॉल के जरिए खुद को ED, CBI या पुलिस अधिकारी बताते हैं। वे कहते हैं कि आपका अकाउंट फंस गया है और ‘डिजिटल अरेस्ट’ में हैं, यानी आपको घर से बाहर न निकलने और तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की धमकी देते हैं। मल्होत्रा ने जोर देकर कहा, “यह सब झूठ है। RBI या कोई सरकारी एजेंसी फोन पर पर्सनल जानकारी या पेमेंट नहीं मांगती।” उदयपुर और राजस्थान के अन्य जिलों में पिछले महीने 50 से अधिक ऐसे मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें लाखों रुपये की ठगी हुई।

मल्होत्रा ने अपनी नियुक्ति के बाद पहली बार राजस्थान में आकर यह संदेश दिया, जो उनके गृह राज्य होने के नाते खास महत्वपूर्ण है। वे 1990 बैच के राजस्थान कैडर IAS अधिकारी हैं और 11 दिसंबर 2024 से RBI गवर्नर का पद संभाल चुके हैं। समिट में उन्होंने डिजिटल बैंकिंग की बढ़ती लोकप्रियता पर भी चर्चा की, लेकिन साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता बताई।

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RBI ने उदयपुर समिट के दौरान जारी एडवाइजरी में ये सुझाव दिए हैं:

  • घबराएं नहीं: डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी अवधारणा नहीं है। फोन पर धमकी मिले तो कॉल काट दें।
  • सत्यापन करें: किसी भी सरकारी कॉल की पुष्टि आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से करें।
  • डेटा शेयर न करें: पर्सनल, बैंक या आधार डिटेल्स कभी फोन पर न दें।
  • रिपोर्ट करें: संदिग्ध कॉल मिले तो 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
  • जागरूक रहें: परिवार और दोस्तों को इस बारे में बताएं, खासकर बुजुर्गों को।

राजस्थान पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में अब तक साइबर फ्रॉड के 10,000 से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं, जिनमें डिजिटल अरेस्ट के मामले प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डीपफेक वीडियो और AI टूल्स से ठग और स्मार्ट हो गए हैं। संपादकीय टीम की राय है – मल्होत्रा की चेतावनी को गंभीरता से लें। डिजिटल इंडिया के दौर में सतर्कता ही सुरक्षा है। सरकार को स्कूलों और कॉलेजों में साइबर शिक्षा को अनिवार्य करना चाहिए।

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