हिमाचल प्रदेश को आपदा प्रभावित राज्य घोषित: भारी बारिश से 3,056 करोड़ का नुकसान, राहत पैकेज की घोषणा

 हिमाचल प्रदेश को भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ के कारण आपदा प्रभावित राज्य घोषित किया गया। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में 3,056 करोड़ के नुकसान का अनुमान जताया। राहत और पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज की घोषणा। पूरी खबर पढ़ें।

शिमला, 1 सितंबर 2025: हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने हिमाचल को आपदा प्रभावित राज्य घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को विधानसभा में एक विशेष वक्तव्य में यह घोषणा की, जिसमें उन्होंने बताया कि जब तक बारिश का दौर जारी रहेगा, यह घोषणा प्रभावी रहेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस साल की प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य को 3,056 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है। सड़कों, पुलों, पेयजल योजनाओं और बिजली संरचनाओं को सबसे ज्यादा क्षति हुई है। सबसे अधिक प्रभावित जिले चंबा, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी, शिमला, कांगड़ा और हमीरपुर हैं।

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, 20 जून से 25 अगस्त तक बारिश से संबंधित घटनाओं में 156 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 38 लोग लापता हैं। इस दौरान 77 अचानक बाढ़, 41 बादल फटने और 81 बड़े भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे कुल नुकसान 2,394 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। आपदा प्रभावित राज्य घोषित होने से राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज करने में मदद मिलेगी। सीएम सुक्खू ने बताया कि प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की गई है, जिसमें पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों के लिए राहत राशि को 7 लाख से बढ़ाकर 7.7 लाख रुपये किया गया है।

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राज्य सरकार, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन दिन-रात राहत कार्यों में जुटे हैं। सड़कों और पुलों की मरम्मत, पेयजल और बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टियां घोषित की गई हैं, और प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए जा रहे हैं। हिमाचल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार हर स्थिति पर नजर रख रही है और प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाई जा रही है। सीएम सुक्खू ने केंद्र से समय पर मदद की अपील की और कहा कि सभी पहाड़ी राज्यों की पीड़ा को साझा करते हुए पुनर्वास कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल में बार-बार आ रही प्राकृतिक आपदाओं पर चिंता जताते हुए कहा है कि अनियोजित निर्माण और प्रकृति से खिलवाड़ इसके लिए जिम्मेदार है। कोर्ट ने 14 सरकारी विभागों को 25 अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा है, जिसमें आपदा के कारणों और सुधारात्मक कदमों का विवरण मांगा गया है। मुख्यमंत्री ने जनता से नदियों, नालों और पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा से बचने की अपील की है। मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा और मंडी में अगले दो दिनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जबकि ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन, मंडी और कुल्लू में ऑरेंज अलर्ट लागू है। हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून ने भारी तबाही मचाई है, जिसके चलते राज्य सरकार ने इसे आपदा प्रभावित घोषित किया है। राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज करने के साथ-साथ केंद्र से अतिरिक्त मदद की उम्मीद की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए पर्यावरण संरक्षण और नियोजित विकास पर ध्यान देना होगा।

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