अब ट्रम्प को सपोर्ट कर पछता रहे भारतीय
2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प की जीत ने भारत में कई लोगों को उत्साहित किया था। विशेष रूप से भारतीय-अमेरिकी समुदाय और भारत में कुछ हिंदुत्व समर्थकों ने ट्रम्प के लिए फंडिंग और प्रचार में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लेकिन अब, ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ और उनके सहयोगियों के भारत विरोधी बयानों के बाद, कई समर्थक अपने निर्णय पर पछता रहे हैं।
2019 में ह्यूस्टन में आयोजित “हाउडी मोदी” और 2020 में भारत में “नमस्ते ट्रम्प” जैसे आयोजनों ने ट्रम्प और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दोस्ती की छवि को मजबूत किया था। भारतीय-अमेरिकी समुदाय में रिपब्लिकन हिंदू कोएलिशन जैसे संगठनों ने ट्रम्प के लिए 1.2 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई और उनके समर्थन में प्रचार किया। मीरजापुर और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी, कुछ लोग ट्रम्प को भारत के हित में देखते थे, खासकर उनकी कथित शांति स्थापना और हिंदू समुदाय के प्रति समर्थन के दावों के कारण।
ट्रम्प के दोबारा सत्ता में आने के बाद, उनके प्रशासन ने भारत पर 50% टैरिफ लागू किया, जिसका असर भारत के 10 से अधिक उद्योगों पर पड़ा। अनुमान के अनुसार, इससे भारत को 2.17 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा और लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। ट्रम्प के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर रूस के साथ तेल व्यापार को लेकर “मोदी का युद्ध” जैसे आपत्तिजनक बयान दिए और भारत की सांस्कृतिक पहचान पर निशाना साधा।
मीरजापुर के स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता रमेश तिवारी ने कहा, “हमने सोचा था कि ट्रम्प भारत के दोस्त हैं, लेकिन उनके टैरिफ और बयानों ने हमें धोखा दिया। यह हमारे लिए सबक है कि हमें अपनी ताकत पर भरोसा करना चाहिए।”
अमेरिका में रहने वाले भारतीय-अमेरिकी, जो ट्रम्प के समर्थन में थे, अब बढ़ते नस्लवाद और टैरिफ के प्रभावों से चिंतित हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई भारतीय-अमेरिकियों ने अपनी निराशा व्यक्त की है। एक यूजर ने लिखा, “हमने ट्रम्प को वोट दिया, लेकिन अब नौकरियां और व्यापार खतरे में हैं। यह हमारी गलती थी।” पूर्वी तट पर सरकारी नौकरियों में कार्यरत भारतीय-अमेरिकी विशेष रूप से डरे हुए हैं, जबकि पश्चिमी तट पर नस्लवाद की घटनाओं में वृद्धि ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।