धातु निर्मित मांझे पर रहेगा सख्त प्रतिबंध

प्रतापगढ़,28 दिसंबर। जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत लोक स्वास्थ्य व विद्युत संचालन बनाए रखने एवं पक्षियों के लिए बड़े पैमाने पर खतरा बन चुके “धातु निर्मित मांझा (पतंग उड़ाने के लिये पक्का धागा, नायलोन / प्लास्टिक मांझा, चाईनीज मांझा जो सिंथेटिक / टोक्सीक मेटेरियल यथा आयरन पाउडर, ग्लास पाउडर का बना हो)” की थोक एवं खुदरा बिक्री तथा उपयोग जिले की राजस्व सीमा /क्षेत्राधिकारिता में निषेध/प्रतिबंधित करने का आदेश जारी किया है । आदेशानुसार मकर संक्रांति पर्व पर पतंगबाजी हेतु धातुओं के मिश्रण से निर्मित मांझा उपयोग किया जाता है, यह मांझा विभिन्न धातुओं के मिश्रण के प्रयोग से तैयार किया जाता है, जिसे पतंग के पेंच लड़ाने में अधिक कारगर मानते हुए इसका प्रयोग अधिक किया जाने लगा है। यह मांझा विभिन्न धातुओं के मिश्रण से निर्मित होने से धारदार तथा विद्युत का सुचालक होता है, जिसके उपयोग के दौरान, दोपहिया वाहन चालकों तथा पक्षियों को अत्यधिक जान-माल का नुकसान होना संभाव्य है, साथ ही विद्युत सुचालक होने के कारण विद्युत तारों के सम्पर्क में आने पर विद्युत प्रवाह होने से पतंग उड़ाने वाले को भी नुकसान पहुंचना एवं विद्युत सप्लाई में बाधा उत्पन्न होना भी संभाव्य है। आदेशानुसार इस समस्या व खतरे के निवारण हेतु धातु निर्मित मांझा (पतंग उड़ाने के लिये पक्का धागा, नायलोन या प्लास्टिक मांझा, चाईनीज मांझा जो सिंथेटिक या टोक्सिक मेटेरियल यथा आयरन पाउडर, ग्लास पाउडर का बना हो) के उपयोग एवं विक्रय को निषेद्य किया गया है। उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय राज. खण्डपीठ जयपुर द्वारा डी.बी. सिविल रिट पिटिशन (PIL) न. 15793/2011 महेश अग्रवाल बनाम राज्य एवं अन्य में जारी दिशा निर्देश दिनांक 22.08.2012 एवं माननीय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, नई दिल्ली द्वारा प्रकरण संख्या 384/2016 Khalid Ashraf &Anr.Vs. Union Of India & Ors. में पारित आदेश दिनांक 14.12.2016 में भी पतंग उड़ाने के लिए उपरोक्त हानिकारक सामग्री से बने धागे के उपयोग को परमिट नहीं किया है। यह आदेश 28 दिसंबर 2023, गुरुवार की मध्यरात्रि से प्रभावी हो गया है और 30 जनवरी 2024 की मध्य रात्रि तक प्रभावी रहेगा। उन्होंने सभी नागरिकों को इस आदेश की पालना करने एवं अवहेलना नहीं करने के निर्देश दिए है। उल्लेखनीय है कि निषेद्याज्ञा की अवहेलना या उल्लंघन किए जाने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दण्डनीय होगा। शहर से लेकर गांवों तक कार्रवाई के लिए टीमें गठित जिला कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट ने वर्जित श्रेणी के मांझे के उपयोग पर प्रतिबंध हेतु जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में दलों का गठन कर उन्हे अपने-अपने क्षेत्रों का भ्रमण करने एवं इस प्रकार के घातक मांझों की बिक्री होती पाए जाने पर त्वरित रुप से नियमानुसार जब्ती एवं नष्टीकरण की कार्यवाही संपादित करने हेतु निर्देशित किया है। साथ ही इस संबंध मे शहरी क्षेत्र हेतु संबंधित क्षेत्र का उपखण्ड मजिस्ट्रेट, संबंधित क्षेत्र का तहसीलदार, आयुक्त/अधिशाषी अधिकारी संबंधित नगरीय निकाय, संबंधित थानाधिकारी और ग्रामीण क्षेत्र हेतु संबंधित क्षेत्र का उपखण्ड मजिस्ट्रेट, संबंधित क्षेत्र का तहसीलदार ,संबंधित पंचायत समिति का विकास अधिकारी, संबंधित थानाधिकारी की टीमों को आकस्मिक जांच एवं संपुष्ट सूचना प्राप्त होने पर त्वरित कार्यवाही के लिए अधिकृत किया है। साथ ही सभी उपखण्ड अधिकारियों एवं तहसीलदारों को मना करने के पश्चात भी घातक मांझों की बिक्री जारी रखने वाले दोषियों के विरुद्ध दण्ड प्रक्रिया संहिता कि धारा 133 के अन्तर्गत कार्यवाही प्रारम्भ करने एवं प्रकरण को यथा संभव एक सप्ताह के भीतर निस्तारित करने तथा ऐसे दोषियों को अवैध बिक्री बंद करने हेतु पाबंद करने के लिए निर्देशित भी किया है। साथ ही उन्होंने निर्देशित किया है कि धारा 133 दण्ड प्रक्रिया संहिता कि अन्तर्गत जारी आदेशो की अवहेलना के क्रम में संबंधित पुलिस अधिकारीगण भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत आदेशों की अवहेलना का प्रकरण नियमानुसार सक्षम न्यायालय मे दर्ज करावें।

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