पुस्तक समीक्षा : पुलिस की बारात

यूपी के पूर्व डीजीपी व मौजूदा राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने एक पुस्तक लिखी है – पुलिस की बारात। मेरा मानना है कि सिपाही से लेकर डीजीपी स्तर के हर खाकी वर्दीधारी को यह पुस्तक पढ़नी चाहिए। आम जनमानस में पुलिस की घूसखोर छवि चंद लालची पुलिसकर्मियों की वजह से भले बन जाती है लेकिन ज्यादातर लोग अब भी मानते हैं कि पुलिस है तो हम सुरक्षित हैं। बृजलाल की पुस्तक में सिलसिलेवार बढ़ते गैंगवार, गड़गड़ाती बंदूक की गोलियां और बिछती अनगिनत लाशों पर अंकुश पाने की पुलिस को चुनौती का पोस्टमार्टम किया गया है। इस किताब में पश्चिमी यूपी और चंबल के बीहड़ों के आतंक का पर्याय बने कई डकैतों की जीवनशैली और उनके दर्दनाक अंत की कथा को कुल 12 अध्यायों में लिखा गया है। पुस्तक पढ़ने के बाद लगता है कि जब एक पुलिस अफसर का खून जब खौलता है तो प्रतिशोध में दुर्दात अपराधी तेजपाल गूजर जैसों का अंत होता है। पुस्तक में पुलिस टीम की जान जोखिम में पड़ जाने के भी दृश्य हैं। मेरठ के पुलिस लाइन के क्वार्टर में दिव्यांग सिपाही महेंद्र त्यागी की साइलेंट मौत की भी कथा है। सिपाही की मौत से व्यथित पुलिस अफसर बृजलाल ने एक माह के भीतर सिपाही के हत्या के असली हत्यारे को मौत के घाट उतारने के अपने संकल्प को पूरा करने के लिए किस तरह एक बारात का स्वांग रचा कर उसका खात्मा किया, इसकी भी दास्तान है। बृजलाल ने बेबाकी से लिखा है कि जब आदमी के पास अचानक बड़ी मात्रा में पैसे मिलते हैं तो किस प्रकार जीवन शैली बदल जाती है। उत्तर प्रदेश में जब नोएडा का गठन हुआ तो भूमि स्वामियों को बड़ी रकम मिली। मोटी रकम मिलने से यहां दो तरह की जीवनशैली उत्पन्न हुई। एक वे जो मुआवजे की भारी- भरकम रकम पाकर दिल्ली या अन्यत्र कहीं जा बसे और शांतिपूर्ण जीवन को आत्मसात कर लिए, वहीं दूसरे वे जो अधिक धनवान बनने के फेर में अपराध का रास्ता चुन लिए। इस पुस्तक में विस्तृत कहानी है। पुस्तक में दस्यु सुंदरी फूलन के जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है। घनश्याम उर्फ घूंसा बाबा, आपरेशन राजू घोसी, माफिया देवेंद्र चौधरी, धनश्याम केवट, ठाकुर मुरारी सिंह और आगरा का मुकटवा गुलाम नबी उर्फ टोटा पर विस्तृत जानकारी है।

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हर खाकी वालों को बृजलाल की पुस्तक पुलिस की बारात अवश्य पढ़नी चाहिए। यह पुस्तक  जांबाज पुलिसकर्मियों का दस्तावेज भी है। पुलिस राजनीतिक दबाव में किस प्रकार काम करती है, अपराधियों से लोहा लेने में कितनी दिक्कतें आती हैं, इन सारी बातों का जिक्र मिलेगा।

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