निजी स्कूलों के तुगलकी फरमान से अभिभावक त्रस्त

  • एनसीईआरटी पैटर्न की जगह चलाया जा रहा कथित पैटर्न
  • सर्व शिक्षा अभियान के तहत सब पढ़े सब बढ़े साबित हो रहा है हवा हवाई
अभिजीत श्रीवास्तव

जौनपुर:जौनपुर में निजी स्कूलों के चलते सर्व शिक्षा अभियान के तहत सब पढ़े सब बढ़े हवा हवाई साबित हो रहा है, वर्तमान समय में शिक्षा का बाजारीकरण हो रहा है नया सत्र चालू होते ही यह कार्य तेजी से गति पकड़ लेता है। जिसके बहकावें में आकर अभिभावक इसका शिकार हो रहे है। निजी विद्यालयों के ड्योढ़ी पर शिक्षा व्यवस्था दम तोड़ रही है। इस तरह बेतहाशा फीस वृद्धि व मनमानी किताब के मूल्यों से बच्चों को पढ़ना अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी है और शिक्षा विभाग मौन व्रत धारण किया हुआ है। शिक्षा मानव विकास का मूल साधन है। इसके द्वारा मानव की जन्मजात शक्तियों का विकास, उसके ज्ञान एंव कौशल में वृद्धि एंव व्यवहार में परिवर्तन किया जा सकता है और उसे सभ्य व योग्य नागरिक बनाया जाता है। छोटे बच्चों के अंदर बहुत सी मानसिक शक्तियां विद्यमान रहती है। शिक्षक इन अंतनिर्हित शक्तियों को प्रस्फुटन करने में सहायता प्रदान करता है इसलिए शिक्षक को राष्ट्र निर्माता भी कहा जाता है। जिस प्रकार शिक्षक के होंगे, उसी प्रकार के नागरिक होंगे और राष्ट्र का भी उसी प्रकार निर्माण होगा।

जौनपुर में निजी स्कूलों ने स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावक महगाई की मार से परेशान है एक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे के पिता ने बताया कि कक्षा 8 में पढ़ने वाले बच्चो की एक विषय SOCIAL STUDIES की किताब की कीमत 680 रूपये है अन्य बुको के दाम 525 रूपये के आस पास है जो दुकानदार निर्धारित क्ररता है जिसमे 40 प्रतिशत कमीशन विद्यालय को जाता है इसी कड़ी में कस्बा खेतासराय व आस-पास के क्षेत्रों में जहाँ बरसाती मेढ़क की तरह दिखाई देने वाले निजी विद्यालय अधिकतर गैर मान्यता प्राप्त है? अभिभावकों का शोषण करने में कोताही नहीं बरत रहे है। निजी विद्यालय व इंग्लिश मीडियम स्कूलों में अच्छी शिक्षा के नाम पर सिर्फ बच्चों के भविष्य के साथ धड़ल्ले से खिलवाड़ किया जा रहा है। बोले – भाले अभिभावक अपने बच्चों का भविष्य सवारने के चक्कर में इन ठगों का शिकार हो रहे और जिम्मेदारों को इसकी परवाह नहीं है। चाहे चित मरे चाहे पट इससे उनका कोई लेना – देना नही बस दक्षिणा से मतलब है।

यह भी देखें  सिरोही : आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने विदाई समारोह मनाया

सरकार के सख्ती के बावजूद शिक्षाधिकार अधिनियम की सरेराह धज्जियां उड़ाई जा रही है। शिक्षा माफिया नौनिहालों के भविष्य के साथ जमकर खिलवाड़ करने में जुटे हुए है। दरअसल नया सत्र शुरू होने से पहले से ही अच्छी शिक्षा, व्यवस्था व योग्य शिक्षक के नाम पर बाज़ार के विभिन्न चौराहों पर बड़े-बड़े बैनरों के।माध्यम से आकर्षित करने वाले शब्दों में छपे बैनर फला बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त जैसे बैनरों से पाट दिया जाता है। और फिर ठगने का खेल शुरू हो जाता है, इसका कुछ स्कूल अपवाद हो सकता है।
हाल यह है कि शिक्षा के नाम पर धनकुबेर दाखिला ले लेते है फिर अपने मनमुताबिक शोषण करना शुरू कर देते है बेचारे विद्यार्थी और अभिभावकों की मज़बूरी बन जाती है। जिससे उन नौनिहालों का भविष्य चौपट होता चला जाता है। और इन्हीं स्कूलों में योग्य शिक्षक के नाम अयोग्य शिक्षक कम पैसों में भरकर बच्चों को भेड़ की तरह हाँकना शुरू कर देते है। जबकि छोटे बच्चों की बुनियादी शिक्षा और संस्कारित होनी चाहिए। जिससे उनके भविष्य निर्माण की नींव मज़बूत बन सके।

About Author

Leave a Reply

error: Content is protected !!