सेवक नहीं स्वामी हैं अभयानन्द गिरी: एन डी देहाती

देवरिया जिले के लार स्थित अति प्राचीन देव आश्रम मठ पर संतों की काफी पुरानी श्रृंखला रही है। वर्ष 1730 में जब यह समूचा क्षेत्र वनों से घिरा था तब नागा बाबा, मौनी बाबा ने यहाँ देव आश्रम की स्थापना की। तबसे लेकर अब तक देव आश्रम मठ लार पर लगभग दस सन्यासियों ने क्रमशः इस पीठ को अपने अध्यात्म ऊर्जा से आलोकित किया। धर्म-कर्म के साथ सन्यास जीवन में रहकर भी इस मठ के महंतों ने न सिर्फ स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया बल्कि समाज सेवा में कीर्तिमान स्थापित किया। देवाश्रम मठ लार में शिशु स्तर से स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षा के अनेक संस्थान इसी मठ के महंत स्वर्गीय देवानन्द गिरी जी और स्वर्गीय चंद्रशेखर गिरी जी द्वारा रखी आधारशिलाओं पर पुष्पित-पल्लवित हो रहे हैं। इस पीठ के नौवें महंत ब्रह्मलीन स्वामी चंद्रशेखर गिरी जी महाराज ने आश्रम के शिक्षण संस्थाओं के पोषण के लिए ईंट भट्ठे और राशन की दुकान तक चलाया। आज से 43 वर्ष पूर्व जब वे ब्रह्मलीन हुए तो पहले से बनाये गए उनके उत्तराधिकारी स्वामी भगवान गिरी ने देवाश्रम मठ लार की गद्दी सम्हाली। उम्र के अंतिम पड़ाव पर चल रहे स्वामी भगवान गिरी काफी अस्वस्थ्य हैं, और लंबे समय से इस आश्रम पर नहीं आते हैं।
स्वामी भगवान गिरी ने जुलाई 2019 में अपने शिष्य स्वामी विवेकानन्द विनीत गिरी को देवाश्रम मठ लार पर अपना उत्तराधिकारी बनाकर भेजा था। कुछ ही दिन देवाश्रम मठ लार पर रहने के बाद स्वामी विवेकानन्द विनीत गिरी उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर के महंत हो गए। तबसे लार मठ की गद्दी खाली चल रही थी। अब भगवान गिरी के शिष्य व महाकालेश्वर के महंत स्वामी विवेकानंद विनीत गिरी के गुरुभाई स्वामी अभयानन्द गिरी लार मठ की गद्दी सम्हालेंगे। पिछले साथ-आठ माह से अभयानन्द गिरी देवाश्रम मठ की देखभाल कर रहे हैं। वे अभी तक अपने को सेवक ही कहते हैं। बहुत कम लोगों को पता है यह सेवक ही यहाँ का असली स्वामी है। 33 वर्षीय स्वामी अभयानन्द गिरी का जन्म 1990 में हुआ। उन्होंने अद्वैत वेदांत से आचार्य तक की शिक्षा चिन्मय मिशन हिमांचल से की। शिक्षा ग्रहण के बाद वे श्रीपंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा, कनखल-हरिद्वार में वर्ष 2010 में स्वामी भगवान गिरी के शिष्य बन कर नागा साधु बन गए। तेरह वर्ष की सन्यास साधना के बाद इन्हें महानिर्वाणी अखाड़ा से देवाश्रम मठ लार की गद्दी सम्हालने के लिए भेजा गया है। बातचीत में स्वामी अभयानन्द गिरी ने कहा कि पूज्य गुरुवर स्वामी भगवान गिरी के आदेश पर देवाश्रम मठ लार की देखभाल करने आया हूँ। बहुत जल्द इस आश्रम का कायाकल्प आप सभी को दिखेगा।