सरकारी दावे झुट्ठे, किसानों की फसल चौपट कर रहे आवारा पशु
देवरिया। सरकार के गो आश्रय केंद्र केवल कागजों में खाने कमाने के धंधे बने हैं। हकीकत यह है कि किसानों की फसल को नीलगायें व आवारा पशु चौपट कर रहे हैं। प्रशासन न तो आवारा पशुओं को पकड़वा कर गो आश्रय केंद्रों में भेज रहा न वन विभाग नीलगायों से निजात दिला पा रहा। किसान की फसल उसकी आँखों के सामने बर्बाद हो रही। सर्द रात में आवारा जानवर किसानों की फसल को चौपट कर रहे किसान परेशान हैं सरकार मौन है। अधिकारी मगन हैं। जिले के ब्लाक क्षेत्र पथरदेवा के मलघोट विरैचा, कंठीपट्टी गांव के साथ ही शिवमंदिर मछैला व छितावनी गांव के ताल में गोवंशीय पशुओं में सबसे अधिक संख्या बछड़ों की है जो आसपास के गांव में पहुंचकर फसलों को नष्ट कर रहे हैं। इन पशुओं से गांव नेरुआरी, मुरारछापर, महुआरी, भेलीपट्टी, पकड़ियार, नोनियापट्टी आदि गांव के लोग आतंकित है। रात भर जग कर किसान अपने खेतों की फसल की रखवाली कर रहे हैं। इसके बावजूद मौका पाकर पशु किसानों की फसल नष्ट कर दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में एक साथ दर्जनों बेसहारा पशु रात में खेतों में प्रवेश करते हैं और कुछ ही घंटों में फसल रौंद देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा हर ब्लाक क्षेत्र में पशुओं को रखने के लिए पशु आश्रय केंद्र बनाए गए है जहां उनकी देख- रेख के लिए सरकार द्वारा कर्मचारियों की तैनाती के साथ ही उनके चारे के लिए धन की भी व्यवस्था की गई है। इसके बाद भी संबंधित जिम्मेदार अधिकारी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर निलगायों की संख्या दिन प्रति दिन बढ़ रही है। इसे रोकने के लिए न तो वन विभाग कोई कदम उठा रहा और न ही जिला प्रशासन।आलोक सिंह, खंड विकास अधिकारी ने बताया कि ब्लाक क्षेत्र में अभी मात्र एक ही पशु आश्रय केंद्र बना है, शीघ्र एक और मघोटविरैचा में भी केंद्र संचालित होने जा रहा है, जिससे क्षेत्र के किसानों को आवारा पशुओं से छुटकारा मिल सकेगा।