गोरखपुर। गोलघर स्थित चटोरी गली को नो-व्हीकल जोन बनाए जाने के फैसले के विरोध में बुधवार, 14 अक्टूबर को व्यापारियों ने अपने फूडकोर्ट बंद रखकर प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने एकजुट होकर नारेबाजी की और नगर निगम से इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि रास्तों पर वाहनों की आवाजाही बंद होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है।
नगर निगम ने गोलघर में करीब आठ करोड़ रुपये खर्च कर चटोरी गली को विकसित किया था। अब इसी क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले को लेकर व्यापारियों और प्रशासन के बीच असहमति सामने आई है।
कारोबार में 50 से 60 प्रतिशत गिरावट का दावा
प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों का कहना है कि पिछले करीब डेढ़ वर्ष से चटोरी गली के दोनों ओर रास्ते बंद होने के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई है। व्यापारियों ने दावा किया कि इससे उनका कारोबार 50 से 60 प्रतिशत तक घट गया है। उनका कहना है कि यदि ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होगी तो फूडकोर्ट और अन्य प्रतिष्ठानों का व्यवसाय प्रभावित होना स्वाभाविक है।
इसी समस्या को लेकर व्यापारियों ने नो-व्हीकल जोन के निर्देश तत्काल वापस लेने की मांग उठाई। उन्होंने चेतावनी दी कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होने पर विरोध जारी रह सकता है।
नगर आयुक्त से बातचीत के बाद भी नहीं निकला रास्ता
व्यापार मंडल के अध्यक्ष नितिन जायसवाल के अनुसार, 13 अक्टूबर को व्यापारियों ने बैठक कर अगले दिन चटोरी गली के फूडकोर्ट बंद रखने का निर्णय लिया था। उन्होंने बताया कि नगर आयुक्त अजय जैन भी व्यापारियों से बातचीत करने पहुंचे थे।
बैठक में समस्याओं पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। व्यापारियों के मुताबिक, नगर आयुक्त ने यातायात पुलिस से वार्ता कर रास्ता निकालने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद व्यापारी अपने विरोध पर कायम रहे और बुधवार को दुकानें बंद रखकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में कई व्यापारी हुए शामिल
विरोध प्रदर्शन में अनिल अग्रवाल, अमन यादव, दिग्विजय सिंह, नवीन सिंह, सुशील अग्रवाल, जिशान अहसन, पुनीत जिंदल, प्रदीप टेकरीवाल, राजकुमार गुप्ता, जमाल अहमद, दीपक जालान, इसरार अहमद, अनिल सिंह, अनूप सिंह, जफर, धनंजय पांडेय और रवि समेत अन्य व्यापारी शामिल रहे।
बातचीत के दौरान बेतियाहाता के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी भी मौजूद थे। व्यापारियों ने अपनी समस्याएं रखते हुए प्रशासन से ऐसा समाधान निकालने की मांग की, जिससे यातायात व्यवस्था भी बनी रहे और दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित न हो।
फैसले पर पुनर्विचार की मांग
व्यापारियों का कहना है कि चटोरी गली को विकसित करने पर बड़ी धनराशि खर्च की गई है, इसलिए यहां आने वाले ग्राहकों की सुविधा और दुकानदारों की आजीविका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि नो-व्हीकल जोन के फैसले पर पुनर्विचार कर सभी पक्षों से बातचीत के बाद व्यवस्था तय की जाए।
फिलहाल व्यापारियों के विरोध के बीच निगाहें नगर निगम और यातायात पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। इस मामले में प्रशासन की ओर से अंतिम समाधान की जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।