सरयू के बढ़ते तेवर से फिर सहमे तटवर्ती गांव, बरहज में खतरे के निशान से 80 सेमी ऊपर पानी

देवरिया के भागलपुर और बरहज क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों में चिंता बढ़ गई है। बाढ़ की आशंका के बीच प्रशासन ने निगरानी और तैयारियां तेज कर दी हैं।

देवरिया के बरहज में बढ़ता सरयू नदी का जलस्तर

बरहज क्षेत्र में बढ़ते सरयू नदी के जलस्तर का दृश्य।

देवरिया के बरहज में बढ़ता सरयू नदी का जलस्तर

देवरिया। कुछ दिन की राहत के बाद सरयू नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पानी बढ़ने के साथ ही नदी का दबाव तटवर्ती इलाकों पर बढ़ गया है। बरहज क्षेत्र में सरयू खतरे के निशान को पार कर चुकी है, जबकि भागलपुर के तुर्तीपार गेज पर भी जलस्तर तेजी से ऊपर बढ़ रहा है। नदी के तेवर को देखते हुए दियारा और किनारे बसे गांवों में लोगों की चिंता फिर बढ़ गई है।

बरहज में सोमवार को थाना घाट स्थित मापक पर सरयू का जलस्तर 67.30 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 66.50 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। पिछले 12 घंटे में जलस्तर में करीब 60 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पानी बढ़ने से घाट की सीढ़ियां डूब गई हैं और दियारा के निचले हिस्सों में पानी फैलने लगा है।

उधर भागलपुर क्षेत्र में भी सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। तुर्तीपार गेज पर रविवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर 63.69 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि खतरे का निशान 64.01 मीटर है। इसके बाद भी नदी करीब एक से दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही थी। सोमवार को जारी एक अन्य रिपोर्ट में तुर्तीपार ब्रिज गेज पर 64.34 मीटर का स्तर दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। अलग-अलग समय के आंकड़ों के कारण जलस्तर की स्थिति लगातार बदल रही है।

दियारा में कटान ने बढ़ाई किसानों की चिंता

पानी बढ़ने के साथ ही सरयू की धार भी तेज हो गई है। परसिया देवार क्षेत्र में नदी के कटान से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। उग्रसेन सेतु के दक्षिण तटीय हिस्से में कृषि योग्य जमीन नदी की धारा में समाने की बात सामने आई है। खेती की जमीन कटने से किसानों के सामने फसल के साथ अपनी जमीन बचाने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

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नदी का पानी बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों की निगाह लगातार नदी के रुख पर टिकी है। ग्रामीणों को खेतों में खड़ी फसल, पशुओं के चारे और आवागमन को लेकर चिंता सताने लगी है। बारिश के कारण पहले से नम खेतों में दोबारा पानी पहुंचने से धान की फसल को नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है। जिले में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में धान की फसल और पशुओं के चारे को लेकर किसानों की परेशानी की रिपोर्ट भी सामने आई है।

122 गांवों पर प्रशासन की नजर

बरहज तहसील क्षेत्र में बाढ़ की दृष्टि से 122 गांव संवेदनशील माने जाते हैं। इनमें 26 गांव उच्च, 23 मध्यम और 73 निम्न स्तर की संवेदनशीलता वाले बताए गए हैं। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र को बरहज, मईल और महेन बाबू सेक्टर में बांटकर निगरानी की जा रही है। प्रशासन की ओर से 15 बाढ़ चौकियां सक्रिय की गई हैं और संबंधित कर्मचारियों की तैनाती की गई है।

सरयू के साथ राप्ती भी बढ़ी

सरयू के साथ राप्ती नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। राप्ती का रुख बढ़ने से भदिला अव्वल सहित नदी किनारे के गांवों में भी लोगों की चिंता बढ़ी है। प्रशासनिक स्तर पर दोनों नदियों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर पानी बढ़ने की रफ्तार बनी रही तो दियारा और निचले इलाकों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

ग्रामीणों की नजर अब अगले कुछ घंटों में नदी के जलस्तर पर टिकी है। नदी का पानी जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे तटवर्ती इलाकों में एक बार फिर बाढ़ की आशंका गहराने लगी है।

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