अफगानिस्तान में विनाशकारी भूकंप: मरने वालों की संख्या 1,400 के पार, हजारों घायल

जलालाबाद, 2 सितंबर 2025: अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में रविवार देर रात आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि इस आपदा में मरने वालों की संख्या 1,411 हो गई है, जबकि 3,124 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित कुнар प्रांत में 5,000 से अधिक घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।

संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र जलालाबाद से 27 किलोमीटर पूर्व में था और यह केवल 8-10 किलोमीटर की गहराई पर था, जिसके कारण इसका विनाशकारी प्रभाव और बढ़ गया। कुнар और नंगरहार प्रांतों में कई गांव पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गए। भूकंप के बाद कम से कम पांच बड़े झटके (aftershocks) भी दर्ज किए गए, जिसने राहत और बचाव कार्यों को और जटिल बना दिया। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सड़कों के नष्ट होने और भूस्खलन के कारण बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। हेलीकॉप्टरों के जरिए घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा है, लेकिन कई गांवों तक अभी भी कोई सहायता नहीं पहुंच पाई है। कुnar के नूरगल जिले के मजार दारा गांव में एक स्थानीय निवासी अब्दुल्ला ने कहा, “यहां एक भी घर खड़ा नहीं बचा। हर घर में मौत का मंजर है।”

तालिबान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल सहायता की अपील की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत ज़मान ने कहा, “हमें तत्काल मदद चाहिए क्योंकि बहुत सारे लोग अपनी जान और घर गंवा चुके हैं।” अब तक भारत, ईरान, जापान और यूरोपीय संघ ने सहायता की पेशकश की है, जिसमें भारत ने 1,000 परिवारों के लिए टेंट और 15 टन खाद्य सामग्री भेजी है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान में पहले से ही मानवीय सहायता की कमी और तालिबान की नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी आई है।

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अफगानिस्तान, हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला में भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित होने के कारण भूकंप के लिए संवेदनशील है। 2022 में 5.9 तीव्रता के भूकंप ने 1,000 से अधिक लोगों की जान ली थी, जबकि 2023 में हेरात प्रांत में 6.3 तीव्रता के भूकंप में तालिबान के अनुसार 4,000 लोग मारे गए थे। यह भूकंप ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान पहले से ही गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है। चार साल के सूखे, अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती, और पाकिस्तान व ईरान से लाखों अफगानों की जबरन वापसी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, देश की 42 मिलियन आबादी में से आधे से अधिक लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं।

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