IPS अरविंद चतुर्वेदी: ड्राइवर बनकर बच्ची बचाई, पहाड़ काटकर रास्ता बनाया

उत्तर प्रदेश के विजिलेंस विभाग में डीआईजी और 2011 बैच के IPS अधिकारी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी की कहानी साहस, समर्पण और सामाजिक सेवा का अनूठा उदाहरण है। 18 दिन की अथक मेहनत के बाद उन्होंने एक किडनैप बच्ची को ड्राइवर बनकर अपहरणकर्ताओं से छुड़ाया और महोबा में पहाड़ काटकर रास्ता बनवाया। उनकी यह कहानी न केवल पुलिस सेवा की मिसाल है, बल्कि सामाजिक बदलाव की प्रेरणा भी देती है।

लखनऊ में 2016 में रिजवी साहब की बेटी शिफा का अपहरण हो गया था। अपहरणकर्ताओं ने फिरौती मांगी, लेकिन परिवार को डर था कि पैसे देने के बाद भी बच्ची वापस न आए। तत्कालीन SP अरविंद चतुर्वेदी ने एक जोखिम भरी योजना बनाई। वह और एक अन्य पुलिसकर्मी रिजवी साहब के ड्राइवर बनकर कुर्ता-पायजामा पहनकर तय जगह पहुंचे। अपहरणकर्ताओं को पैसे का बैग दिखाया गया। जैसे ही शिफा को सौंपा गया, अरविंद ने तुरंत कार्रवाई की। एक अपहरणकर्ता के पैर में गोली मारकर उसे मौके पर पकड़ लिया गया, और बाकी तीन को अगले 24 घंटों में गिरफ्तार कर लिया गया। 18 दिन बाद शिफा अपने परिवार के पास सकुशल लौटी। अरविंद ने बताया, “उस पल जब बच्ची ने अपनी मां को गले लगाया, वह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा इनाम था।”

अरविंद चतुर्वेदी की सामाजिक सेवा की भावना भी उतनी ही प्रेरक है। 2017 में महोबा में SP के रूप में तैनाती के दौरान उन्होंने देखा कि ग्रामीणों को पहाड़ी रास्तों की वजह से आवागमन में भारी दिक्कत होती थी। उन्होंने सुब्बा राव के साथ मिलकर एक नेशनल कैंप का आयोजन किया, जिसमें 22 राज्यों से 750 युवा शामिल हुए। रात में पहाड़ी में ब्लास्ट किए गए, और दिन में कैंपर्स मलबा हटाते। कॉलेज के छात्रों ने भी उत्साह से हिस्सा लिया। इस मुहिम से महोबा के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें बनीं, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन आसान हुआ।

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अरविंद अपने पिता के संस्कारों को अपनी सफलता का आधार मानते हैं। गोरखपुर में सरकारी आवास में रहते हुए उनके पिता बागवानी करते थे। वह सूखे फूलों के बीज इकट्ठा करते और अरविंद को कहते, “जहां नमी दिखे, वहां बीज डाल देना। ये बीज घर में सड़ जाएंगे, लेकिन बाहर पेड़ बनकर फूल खिलाएंगे।” इस सीख ने अरविंद को समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कानपुर के शुभम द्विवेदी शहीद हो गए। इस त्रासदी के बाद राहुल गांधी ने शुभम के परिवार से मुलाकात की और उनकी पत्नी एशान्या को सांत्वना दी। अरविंद चतुर्वेदी जैसे अधिकारी इस तरह के हालात में न केवल कानून व्यवस्था संभालते हैं, बल्कि अपनी मानवीय संवेदनशीलता से समाज को प्रेरित भी करते हैं। शुभम की शहादत और अरविंद की कहानी दोनों ही देश के लिए बलिदान और सेवा की भावना को दर्शाती हैं।

अरविंद की कहानी उस समय और प्रासंगिक हो जाती है, जब केंद्र सरकार ने जाति जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। यह कदम सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है। अरविंद जैसे अधिकारी, जो सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं, इस जनगणना के डेटा का उपयोग समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने में मदद कर सकते हैं।

IPS अरविंद चतुर्वेदी की कहानी साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक सेवा का संगम है। ड्राइवर बनकर बच्ची को अपहरणकर्ताओं से छुड़ाने से लेकर पहाड़ काटकर रास्ता बनाने तक, उन्होंने पुलिस की वर्दी को एक नई पहचान दी। उनकी कहानी न केवल युवाओं को प्रेरित करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सच्चा अधिकारी वही है, जो समाज के दुख-दर्द को अपना समझे। शुभम द्विवेदी जैसे शहीदों की याद में और सामाजिक बदलाव के लिए अरविंद जैसे अधिकारियों का योगदान देश को हमेशा गौरवान्वित करेगा।

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