अधर्म का फल भोगना ही पडता है
प्रश्न :- पापी अधर्मी व्यक्ति को उसके पाप की सजा क्यो नही मिलती और वो पाप करके भी हमेशा सुखी क्यो रहता है ??
उत्तर – पापी को उसके किए की सजा अवश्य मिलती है लोगो को लगता है कि वह सुखी हे पर वो धीरे धीरे घोर विनाश की और बढता है । शास्त्रो मे इसके प्रमाण है…….
नाधर्मश्चरितो लोके सद्यः फलति गौरिव
शनैरावर्तमानस्तु कर्तुर्मूलानि कृन्तति ।
यदि नात्मनि पुत्रेषु न चेत्पुत्रेषु नप्तृषु
न त्वेव तु कृतोधर्मः कर्तुर्भवति निष्फलः ।।
अर्थात् – जैसे पृथ्वी शीघ्र फल नही देती वैसे ही संसार मे किया हुआ अधर्म तत्काल फल नही देता है, किन्तु किया हुआ अधर्म करने वाले को धीरे धीरे जड मूल से नष्ट कर देता है । अधर्म की फल अधर्मी को भोगना ही पडता है यदि वो नही भोगेगा तो उसके बेटे को भोगना पडेगा बेटा न भोगे तो पोते को भोगना पडेगा, पर किया हुआ अधर्म बिना फल दिए अधर्मी या पापी व्यक्ति को कभी नही छोडता ।
अधर्मेणैधते तावत्ततो भद्राणि पश्यति
ततः सपत्नाञ्जयति समूलस्तु विनश्यति ।।
अर्थात् – पापी पहले उस अधर्म के कारण तरक्की करता है फिर उससे बहुत फल ( धन ) प्राप्त करता है, अपने शत्रुऔ को भी पाप से जीत लेता है, लेकिन अंत मे वो अधर्मी जड सहित नष्ट हो जाता है ।
अतः पाप अधर्म करने से बचे क्योकि उसका फल हर हाल मे भोगना ही पडता है
प्रमाण :- मनु स्मृति ४/१७२-१७४
~ आनन्द कुमार झा