The Newswala – डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन पर टैरिफ 245% तक बढ़ाया

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन से आयातित सामानों पर टैरिफ को और बढ़ाते हुए इसे 245% तक कर दिया है। यह कदम अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध को और तेज करने वाला साबित हो सकता है। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह निर्णय फेंटानिल जैसे मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध व्यापार प्रथाओं के खिलाफ उठाया गया है। ट्रम्प ने 2 अप्रैल 2025 को चीन पर 104% टैरिफ की घोषणा की थी, जो 9 अप्रैल से प्रभावी हुआ। इसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सामानों पर 84% से बढ़ाकर 125% टैरिफ लगाया। इसके बाद ट्रम्प ने 9 अप्रैल को चीन पर टैरिफ को 125% और फिर 145% तक बढ़ाया। ताजा कदम में, टैरिफ को 245% तक बढ़ाने की घोषणा की गई, जिसे वैश्विक बाजारों में बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

चीन ने ट्रम्प के इस कदम को “मजाक” करार देते हुए इसे “नग्न जबरदस्ती” बताया है। बीजिंग ने कहा कि वह इस व्यापार युद्ध में “अंत तक लड़ेगा” और अमेरिकी सामानों पर अपने टैरिफ को और बढ़ा सकता है। वैश्विक बाजारों में इस टकराव का असर साफ दिख रहा है। पिछले सप्ताह स्टॉक मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज वृद्धि हुई। विश्लेषकों का मानना है कि 245% टैरिफ से दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग असंभव हो जाएगा, क्योंकि यह चीनी निर्यातकों के लाभ मार्जिन को खत्म कर देगा। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी गहरा असर पड़ सकता है। ट्रम्प ने दावा किया है कि यह टैरिफ अमेरिकी विनिर्माण को पुनर्जनन देगा और कंपनियों को अमेरिका में स्थानांतरित होने के लिए मजबूर करेगा। हालांकि, कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि इससे मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो सकता है। डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने ट्रम्प के इस कदम की समयसीमा पर सवाल उठाए हैं, और कुछ ने इसे वित्तीय अनियमितता से जोड़ा है। भारत जैसे देशों पर इस व्यापार युद्ध का अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। यदि चीनी सामान यूरोप और अन्य बाजारों में डायवर्ट होता है, तो भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश इस स्थिति का लाभ उठाकर अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।

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ट्रम्प का यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक जोखिम भरा दांव है। जहां एक ओर यह अमेरिकी हितों को मजबूत करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर यह वैश्विक व्यापार को अस्थिर कर सकता है। The Newswala इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और पाठकों को नवीनतम अपडेट्स प्रदान करता रहेगा।

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