गोरखपुर। गोरखपुर नगर निगम में परिवर्तन दल और प्रवर्तन टास्क फोर्स (ETF) के कामकाज और खर्च को लेकर सवाल उठे हैं। दोनों टीमों पर सालाना करीब 1.72 करोड़ रुपये खर्च होने और लगभग 28 लाख रुपये की वसूली का आंकड़ा सामने आने के बाद इनके कार्यों की समीक्षा का मुद्दा कार्यकारिणी की बैठक में उठा। उपसभापति पूनम सिंह ने कर्मचारियों की तैनाती, ड्यूटी और संसाधनों के इस्तेमाल का आकलन कराने का सुझाव दिया है।
मामला केवल वसूली की रकम तक सीमित नहीं है। नगर निगम के संसाधनों से संचालित इन टीमों की जिम्मेदारियां क्या हैं, वे प्रतिदिन कितना काम करती हैं और उनके काम से शहर को क्या लाभ मिल रहा है, इन सवालों का जवाब भी महत्वपूर्ण है।
वेतन, वाहन और डीजल पर कितना खर्च?
प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में दोनों टीमों पर करीब 1.50 करोड़ रुपये वेतन, 12 लाख रुपये वाहन किराये और 10 लाख रुपये डीजल पर खर्च होने की जानकारी दी गई। इस तरह कुल वार्षिक खर्च लगभग 1.72 करोड़ रुपये बताया गया है।
इसी रिपोर्ट में दोनों टीमों की वसूली करीब 28 लाख रुपये बताई गई है। इन आंकड़ों के आधार पर उपसभापति ने खर्च और कामकाज की समीक्षा का सुझाव दिया। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वसूली ही प्रवर्तन टीमों के प्रदर्शन का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकती। अतिक्रमण हटाने, चालान करने और नियमों का पालन कराने जैसे कामों का मूल्यांकन भी जरूरी है।
54 कर्मचारियों की तैनाती पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवर्तन दल और ETF में गार्ड सहित करीब 54 कर्मचारी तैनात हैं। उपसभापति ने कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या, वास्तविक उपस्थिति, ड्यूटी चार्ट और प्रतिदिन किए जाने वाले कार्यों की समीक्षा कराने का सुझाव दिया।
साथ ही, वाहनों के उपयोग को लेकर लॉगबुक, किलोमीटर रीडिंग और ईंधन खर्च का मिलान करने की जरूरत बताई गई। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निर्धारित कार्यों के लिए हो रहा है या नहीं।
रिपोर्ट में अधिकारियों के आवासों पर ETF कर्मियों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए जाने का उल्लेख है। इस विषय में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष और तैनाती के नियम सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नगर निगम के लिए जवाबदेही क्यों जरूरी?
नगर निगम शहर में सफाई, सड़क, जलापूर्ति और दूसरी नागरिक सुविधाओं पर सार्वजनिक धन खर्च करता है। ऐसे में हर विभाग और टीम के खर्च का पारदर्शी हिसाब तथा काम के परिणामों की समीक्षा जरूरी है।
परिवर्तन दल और ETF के मामले में भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने अतिक्रमण हटाए गए, कितने चालान हुए, कितनी राशि वसूल हुई और कर्मचारियों ने निर्धारित ड्यूटी कितनी पूरी की। इन आंकड़ों से टीमों के वास्तविक कामकाज की बेहतर तस्वीर सामने आ सकती है।
अब किन सवालों के जवाब जरूरी?
नगर निगम प्रशासन के सामने इस मामले में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं। दोनों टीमों के खर्च का मदवार विवरण सार्वजनिक किया जाए। कर्मचारियों की उपस्थिति और ड्यूटी चार्ट की समीक्षा हो। वाहनों के लॉगबुक तथा डीजल खर्च का मिलान किया जाए और प्रवर्तन कार्यों के परिणामों का विवरण सामने रखा जाए।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर खर्च और वसूली के आंकड़ों पर समीक्षा की मांग सामने आई है। इन आंकड़ों से अपने आप किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं होती। वास्तविक स्थिति जानने के लिए नगर निगम प्रशासन का पक्ष, संबंधित अभिलेख और समीक्षा के नतीजे महत्वपूर्ण होंगे।
The Newswala का सवाल: नगर निगम की इन टीमों पर खर्च होने वाली राशि के मुकाबले उनके कामकाज का पूरा हिसाब कब सार्वजनिक होगा? शहरवासियों को उम्मीद है कि समीक्षा से खर्च की पारदर्शिता और प्रवर्तन व्यवस्था की प्रभावशीलता दोनों स्पष्ट होंगी।