PM मोदी ने PM-CM के तौर पर पूरे किए 25 साल: गुजरात से दिल्ली तक ऐसा रहा राजनीतिक सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे कर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पड़ाव हासिल किया है। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनने तक नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित अध्यायों में शामिल रही है। सत्ता के शीर्ष पद पर लंबे समय तक बने रहने के साथ उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा की खासियत यह है कि उन्होंने करीब ढाई दशक तक राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर सरकार का नेतृत्व किया। वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। इसके बाद वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के साथ उनका राजनीतिक प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक हुआ। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में लंबे समय तक नेतृत्व करने की यह उपलब्धि भारतीय राजनीति में विशेष महत्व रखती है। इन वर्षों में देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक, बुनियादी ढांचे और शासन व्यवस्था में कई बड़े बदलाव देखने को मिले।
नरेंद्र मोदी ने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद उन्होंने लगातार कई वर्षों तक गुजरात सरकार का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल के दौरान गुजरात के विकास मॉडल को लेकर देशभर में राजनीतिक और आर्थिक बहस हुई। गुजरात में लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान नरेंद्र मोदी ने उद्योग, निवेश, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधारों को अपनी सरकार के प्रमुख मुद्दों में रखा। उनके समर्थकों ने इस दौर को गुजरात के विकास और निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया, जबकि विपक्ष ने उनकी सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल भी उठाए।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लंबे कार्यकाल के बाद नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रमुख चेहरे के तौर पर चुनाव अभियान का नेतृत्व किया। भाजपा ने उस चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया और नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 2014 का चुनाव भारतीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना गया। लंबे समय बाद किसी एक पार्टी को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी।
2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया। भाजपा ने 303 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की और नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। दूसरे कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार ने कई बड़े नीतिगत फैसले लिए। अनुच्छेद 370 में बदलाव, नागरिकता संशोधन कानून, तीन तलाक कानून, नई शिक्षा नीति और कोरोना महामारी के दौरान बड़े स्तर पर राहत एवं टीकाकरण अभियान जैसे मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख रहे।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने दम पर बहुमत से पीछे रही, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA ने बहुमत हासिल किया। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ ली। इस तरह नरेंद्र मोदी जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नेताओं में शामिल हुए। तीसरे कार्यकाल के साथ उनके प्रधानमंत्री के रूप में राजनीतिक सफर का एक नया चरण शुरू हुआ।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी सरकार ने कई कल्याणकारी और विकास से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाया। जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं को बड़े स्तर पर लागू किया गया। सरकार ने डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठाए। UPI के विस्तार ने भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र को नई गति दी। इसके अलावा सड़क, रेलवे, हवाई अड्डों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भी केंद्र सरकार ने जोर दिया।
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति भी लगातार चर्चा में रही। भारत ने G20 की अध्यक्षता की और 2023 में नई दिल्ली में G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने, विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक संबंध बढ़ाने और वैश्विक मंचों पर भारत की प्राथमिकताओं को रखने पर सरकार ने विशेष जोर दिया। समर्थकों का कहना है कि इस दौरान भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और कूटनीतिक प्रभाव मजबूत हुआ है।
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक शैली की एक खास पहचान उनका व्यापक जनसंपर्क अभियान भी रहा है। सार्वजनिक सभाओं, रेडियो कार्यक्रमों, सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए उन्होंने लोगों से सीधे संवाद की शैली को मजबूत किया। ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों और उनके अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता ने भी भारतीय राजनीति में डिजिटल संचार को एक नई दिशा दी।
नरेंद्र मोदी का 25 वर्षों का राजनीतिक सफर उपलब्धियों के साथ-साथ विवादों और आलोचनाओं से भी जुड़ा रहा है। विपक्षी दलों ने बेरोजगारी, महंगाई, कृषि कानूनों, सामाजिक मुद्दों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, मोदी के समर्थक उनके नेतृत्व को निर्णायक और विकास-केंद्रित बताते हैं। यही राजनीतिक मतभेद नरेंद्र मोदी के लंबे सार्वजनिक जीवन को भारतीय लोकतंत्र में बहस का एक महत्वपूर्ण विषय बनाते हैं।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में 25 साल पूरे करना नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इतने लंबे समय तक लगातार सत्ता के शीर्ष पदों पर बने रहना भारतीय राजनीति में असाधारण उपलब्धि मानी जाती है। इस अवधि में उन्होंने न केवल गुजरात की राजनीति में अपनी पहचान बनाई, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में अपनी जगह मजबूत की। उनकी राजनीतिक यात्रा में संगठन, चुनावी रणनीति, जनसंपर्क और नेतृत्व शैली की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के राजनीतिक सफर का मूल्यांकन केवल उनके कार्यकाल की अवधि से नहीं, बल्कि उनके फैसलों और उनके दीर्घकालिक प्रभाव से भी किया जाएगा। आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि उनके नेतृत्व में लिए गए आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और विदेश नीति से जुड़े फैसले भारतीय राजनीति और शासन व्यवस्था को किस तरह प्रभावित करते हैं। आज नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के सबसे प्रमुख और प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री से शुरू हुई उनकी यात्रा देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंची और अब 25 वर्ष पूरे होने के साथ यह सफर एक नए ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुंच गया है। PM Modi 25 Years Record का यह पड़ाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल एक नेता के लंबे राजनीतिक कार्यकाल को नहीं दर्शाता, बल्कि पिछले 25 वर्षों में भारतीय राजनीति में आए व्यापक बदलावों की कहानी भी बताता है। गुजरात से दिल्ली तक नरेंद्र मोदी की यात्रा भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है।
