
देवरिया। न्यायिक अधिकारी जागृति का शुक्रवार को लंबी बीमारी के बाद लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। वह 30 वर्ष की थीं। उनके निधन की खबर मिलते ही न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच शोक की लहर दौड़ गई। कचहरी परिसर में उनके सरल और सौम्य व्यवहार को याद करते हुए लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
छह महीने पहले हुई थी तैनाती
जागृति की तैनाती जनपद में करीब छह महीने पहले हुई थी। कम समय में ही उन्होंने अपने व्यवहार से सहकर्मियों के बीच विशेष पहचान बनाई थी। शुक्रवार को उनके निधन की सूचना मिलने के बाद कचहरी परिसर में शोक का माहौल छा गया। न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने उनके साथ बिताए समय को याद किया।
कोर्ट रेफरेंस कर दी गई श्रद्धांजलि
जनपद न्यायाधीश धनेंद्र प्रताप सिंह की अदालत में कोर्ट रेफरेंस आयोजित किया गया। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने दिवंगत न्यायिक अधिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। शोक सभा में मौजूद लोग उनके असमय निधन से भावुक नजर आए।
श्रद्धांजलि देने वालों में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय ब्रजेश मणि त्रिपाठी, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी इफ्तेखार अहमद, अपर सत्र न्यायाधीश रवि यादव, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रज्ञा सिंह, एसीजेएम हिमांशु वर्मा और सिविल जज जूनियर डिवीजन दीक्षा त्रिपाठी सहित अन्य न्यायिक अधिकारी शामिल रहे।
न्यायिक जगत को अपूरणीय क्षति
शोक सभा के दौरान जागृति के सरल स्वभाव और सौम्य व्यक्तित्व को याद किया गया। उनके निधन को न्यायिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया। महज 30 वर्ष की उम्र में उनके निधन से न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं में गहरा दुख व्याप्त है।
लंबी बीमारी के बाद उनके असमय निधन की खबर ने सभी को भावुक कर दिया। कचहरी परिसर में दिनभर शोक का माहौल बना रहा।