आम आदमी को सीट नहीं, VIP रूम में सोफा भी खटमल वाला! रेलवे DRM को कोर्ट का नोटिस
- छत्रपति संभाजीनगर | विशेष रिपोर्ट
रेलवे स्टेशनों पर आम यात्रियों की परेशानियां किसी से छिपी नहीं हैं। ट्रेन आने से पहले प्लेटफॉर्म पर बैठने की जगह मिलना मुश्किल, भीड़ में खड़े होकर सफर करना और तत्काल टिकट के लिए घंटों मशक्कत करना यात्रियों के लिए आम अनुभव बन चुका है। लेकिन महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन से सामने आया एक मामला रेलवे की सुविधाओं को लेकर एक अलग ही तस्वीर दिखाता है। यहां रेलवे के VIP रूम में रखे पुराने सोफों में खटमल मिलने के बाद रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
मामला मई 2026 का है। दस्तावेज के मुताबिक, बॉम्बे हाई कोर्ट की जस्टिस मंजुषा देशपांडे और उनके पति ने स्टेशन के VIP रूम में रखे पुराने सोफों की स्थिति देखी और वहां खटमल होने की शिकायत सामने आई। इसके बाद रेलवे के न्यायिक मजिस्ट्रेट एस.एम. आहेर ने 20 मई 2026 को नांदेड़ डिवीजन के DRM को पत्र भेजकर VIP रूम में पेस्ट कंट्रोल कराने और पुराने सोफों को बदलकर नए सोफे लगाने के निर्देश दिए थे।
लेकिन सितंबर तक स्थिति में बदलाव नहीं होने का आरोप है। 19 सितंबर 2026 के कारण बताओ नोटिस में कहा गया कि पुराने सोफे बदले नहीं गए और उनमें अभी भी खटमल मौजूद थे। नोटिस के मुताबिक, VIP रूम का इस्तेमाल करने वाले हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को मजबूरी में अपनी कारों में बैठकर इंतजार करना पड़ रहा था।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रेलवे स्टेशन पर जहां आम यात्री ट्रेन में सीट पाने, प्लेटफॉर्म पर बैठने की जगह खोजने और तत्काल टिकट हासिल करने के लिए संघर्ष करता दिखाई देता है, वहीं VIP सुविधा से जुड़ी समस्या पर न्यायिक अधिकारी ने सीधे रेलवे के DRM से जवाब मांग लिया। हालांकि, आम यात्रियों की इन समस्याओं और इस VIP रूम मामले के बीच कोई प्रत्यक्ष कानूनी संबंध नोटिस में नहीं बताया गया है।
नोटिस में कहा गया है कि औरंगाबाद बेंच में 15 से अधिक हाई कोर्ट जज हैं और उनमें से कई ट्रेन से यात्रा करते हैं, जिसके कारण उन्हें स्टेशन के VIP रूम का इस्तेमाल करना पड़ता है। सोफों की स्थिति के कारण उन्हें असुविधा होने की बात नोटिस में दर्ज की गई है।
रेलवे प्रशासन की ओर से मई में दिए गए निर्देशों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर अब DRM, नांदेड़ डिवीजन को 30 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में यह भी पूछा गया है कि निर्देशों का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
इस पूरे मामले ने रेलवे की सुविधाओं को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। आम यात्री अक्सर भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म, ट्रेन में सीट की कमी, वेटिंग टिकट और तत्काल टिकट की परेशानी से जूझते हैं। ऐसे में VIP रूम के पुराने सोफों और उनमें खटमल मिलने की शिकायत पर न्यायिक स्तर तक कार्रवाई पहुंचना सोशल मीडिया और आम चर्चा में सवाल खड़े कर रहा है कि क्या रेलवे की सुविधाओं का स्तर सभी यात्रियों के लिए समान रूप से बेहतर नहीं किया जाना चाहिए?
फिलहाल अदालत की ओर से DRM को नोटिस जारी किया गया है और 30 सितंबर को होने वाली सुनवाई में रेलवे की ओर से क्या जवाब दिया जाता है, इस पर सबकी नजर है।