60 करोड़ की जमीन के खेल ने खड़े किए बड़े सवाल
राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी से लेकर गिरोह की भूमिका तक जांच के घेरे में कई चेहरे
बीआरडीपीजी कॉलेज और केंद्रीय विद्यालय से जुड़ी करीब 60 करोड़ रुपये मूल्य की बेशकीमती जमीन के राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। वर्ष 2018 में राजस्व अभिलेखागार के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से रिकॉर्ड में बदलाव किए जाने की बात जांच में सामने आने के बाद मामला और गहरा गया है। जांच का दायरा अब केवल अभिलेखों में छेड़छाड़ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस को इसके पीछे संगठित गिरोह की भूमिका के भी संकेत मिले हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी संस्थानों से जुड़ी करोड़ों रुपये की जमीन के अभिलेखों में आखिर इतनी आसानी से बदलाव कैसे कर दिया गया। रिकॉर्ड में हेराफेरी किसके इशारे पर हुई और इस पूरी कवायद से किसे लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई, यह जांच का अहम हिस्सा बन गया है।
पुलिस की जांच में गिरोह की भूमिका के संकेत मिलने के बाद अब अभिलेखों में बदलाव से लेकर जमीन से जुड़े संभावित सौदों तक पूरी कड़ी जोड़ना चुनौती है। जांच में यह भी सामने लाना जरूरी होगा कि कथित साजिश की शुरुआत कहां से हुई, रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर कराया गया और इसके पीछे वास्तविक लाभार्थी कौन थे।
करीब 60 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े इस मामले में अब निगाहें जांच की दिशा पर टिकी हैं। केवल अभिलेखागार के कर्मचारियों की भूमिका तक जांच सीमित रहती है या कथित हेराफेरी के पीछे मौजूद पूरी कड़ी सामने आती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
सरकारी संस्थानों से जुड़ी बेशकीमती जमीन के रिकॉर्ड में कथित बदलाव का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राजस्व अभिलेखों की सुरक्षा और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। अब जांच एजेंसियों के सामने चुनौती है कि दस्तावेजों से लेकर जमीन से जुड़े हर पहलू की जांच कर पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने लाई जाए।