बिहार चुनाव 2025: NDA का दम, महागठबंधन की चुनौती, और प्रियंका का तीखा वार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है, और यह चुनाव न केवल बिहार बल्कि पूरे देश की सियासत को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। दो चरणों में होने वाले इस चुनाव (6 और 11 नवंबर) के नतीजे 14 नवंबर को आएंगे, जो 243 सीटों पर बिहार की अगली सरकार तय करेंगे। NDA (BJP-JD(U)) और महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-लेफ्ट) के बीच कांटे की टक्कर है, जिसमें जन सुराज पार्टी जैसे नए खिलाड़ी भी रंग जमाने की कोशिश में हैं। आइए, थी न्यूजवाला की एडिटोरियल टीम आपको बिहार के इस सियासी रण का इतिहास, तथ्य और मौजूदा हालात से रूबरू कराती है।

बिहार का राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 1990 से 2005 तक लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में RJD का शासन, जिसे “जंगल राज” कहा गया, अपराध और भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात रहा। 2005 में नीतीश कुमार की अगुवाई में JD(U)-BJP गठबंधन ने सत्ता संभाली, जिसने बिहार को विकास और कानून-व्यवस्था की नई राह दिखाई। नीतीश, जिन्हें “पलटू राम” भी कहा जाता है, ने कई बार गठबंधन बदले, लेकिन उनकी छवि “सुशासन बाबू” की बनी रही। 2020 के चुनाव में NDA ने 125 सीटें जीतीं, जबकि महागठबंधन को 110 सीटें मिलीं। इस बार भी वही पुराने मुद्दे—गरीबी, पलायन, रोजगार और जातीय समीकरण—चुनावी मैदान में हावी हैं।

चुनाव आयोग ने बिहार में 7.43 करोड़ मतदाताओं के लिए 90,000 से अधिक मतदान केंद्र बनाए हैं, जिसमें 14 लाख नए वोटर शामिल हैं। पहला चरण 6 नवंबर को 121 सीटों पर और दूसरा चरण 11 नवंबर को 122 सीटों पर होगा। वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी। इस बार 17 सुधारों के साथ, जैसे 100% वेबकास्टिंग और EVM पर उम्मीदवारों की तस्वीरें, यह बिहार का सबसे पारदर्शी चुनाव हो सकता है। 500 से अधिक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की टुकड़ियां सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।

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प्रमुख मुकाबले में तेजस्वी यादव (RJD) राघोपुर से, सम्राट चौधरी (BJP) और तेज प्रताप यादव (RJD) जैसे दिग्गज शामिल हैं। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी नया रंग जोड़ रही है, जो नीतीश और लालू दोनों को चुनौती दे रही है।

चुनावी माहौल में PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह NDA के लिए जोरदार प्रचार कर रहे हैं। मोदी ने कटिहार में कहा, “बिहार का भविष्य विकास के लिए NDA को चुने, न कि जंगल राज के लिए।” शाह ने सिवान में दावा किया कि 14 नवंबर को RJD का “सूपड़ा साफ” हो जाएगा। दूसरी ओर, महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को CM चेहरा बनाया है। तेजस्वी का ‘तेजस्वी प्रण पत्र’ रोजगार, भ्रष्टाचार और गरीबी पर केंद्रित है।

कांग्रेस की प्रियंका गांधी ने सहरसा और बेगूसराय में रैलियों में BJP पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “PM मोदी असल मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं। बिहार में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार NDA की देन है।” प्रियंका ने ‘अपमान मंत्रालय’ की बात कहकर PM पर निशाना साधा, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। RJD की मीसा भारती ने भी PM के “कट्टा” वाले बयान पर पलटवार किया, “क्या वे खुद वहां थे?”

एक्स पर #BiharElection2025 ट्रेंड कर रहा है। कुछ यूजर्स का दावा है कि महागठबंधन 147-150 सीटें जीत सकता है, जबकि RJD सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। हालांकि, यह दावा पुष्ट नहीं है। दूसरी ओर, BJP समर्थक NDA की “ऐतिहासिक जीत” का दावा कर रहे हैं।

बिहार का यह चुनाव केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि नीतीश कुमार की विरासत, तेजस्वी की नई लहर, और प्रशांत किशोर की तीसरी ताकत का इम्तिहान है। रोजगार और विकास के वादों के बीच बिहार का वोटर इस बार क्या चुनेगा—सुशासन या बदलाव? यह सवाल 14 नवंबर को जवाब देगा।

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