Jaipur Literature Festival 2027: 20वें संस्करण के पहले वक्ताओं की घोषणा

जयपुर। साहित्य, विचारों और सांस्कृतिक संवाद के वैश्विक मंच जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) ने अपने ऐतिहासिक 20वें संस्करण के लिए पहले वक्ताओं की सूची जारी कर दी है। जनवरी 2027 में आयोजित होने वाला यह महोत्सव साहित्य, विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, पत्रकारिता, राजनीति, कला और संस्कृति से जुड़ी दुनिया की कई प्रतिष्ठित हस्तियों को एक मंच पर लाएगा। आयोजकों के अनुसार, यह संस्करण दो दशकों की साहित्यिक यात्रा का उत्सव होने के साथ-साथ भविष्य के विचारों और नई बहसों को भी जगह देगा।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 20वां संस्करण 14 से 18 जनवरी 2027 तक राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित किया जाएगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में लेखक, पाठक, शिक्षाविद, वैज्ञानिक, पत्रकार, कलाकार और विभिन्न क्षेत्रों के विचारक साहित्य तथा समकालीन दुनिया से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।

इस बार का आयोजन इसलिए भी खास है, क्योंकि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल अपने दो दशक पूरे कर रहा है। इस दौरान महोत्सव ने भारतीय भाषाओं और साहित्य को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के साथ-साथ विभिन्न देशों की संस्कृतियों और विचारधाराओं के बीच संवाद को बढ़ावा दिया है।

पहली घोषित सूची में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित एस्थर डुफ्लो और साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता ओल्गा टोकार्चुक प्रमुख नामों में शामिल हैं। इनके अलावा डेम मीरा स्याल, लिस डूसेट, जेम्स वुड, इसाबेला हम्माद, मार्कस डू सॉटॉय और स्टीव ब्रुसेट जैसे प्रतिष्ठित नाम भी महोत्सव का हिस्सा होंगे।

घोषित सूची में अनामिका, तहमीमा अनम, उमर अल अकाद, अवनी दोषी, होमी के. भाभा, श्राबणी बसु, प्रबल गुरुंग, संजय हजारिका, एस.वाई. कुरैशी, इंदिरा जयसिंह, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, किरण मजूमदार-शॉ, सुधा मूर्ति, गीतांजलि श्री और राधावल्लभ त्रिपाठी सहित अनेक हस्तियां शामिल हैं।

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यह सूची साहित्यिक हस्तियों तक सीमित नहीं है। इसमें विज्ञान, गणित, अर्थशास्त्र, कानून, पत्रकारिता, उद्यमिता, फैशन और प्रदर्शन कला से जुड़े विशेषज्ञों को भी स्थान दिया गया है।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2027 में भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को प्रमुखता दी जाएगी। हिंदी, तमिल, मलयालम, असमिया, कोंकणी, कन्नड़, मराठी, भोजपुरी, सिंधी और अन्य भाषाओं की साहित्यिक परंपराओं से जुड़े लेखक अपनी रचनात्मक यात्रा और विचारों को साझा करेंगे।

घोषित वक्ताओं में हिंदी की कवयित्री अनामिका, संस्कृत के विद्वान राधावल्लभ त्रिपाठी, असमिया लेखक ध्रुबज्योति बोरा, मराठी लेखक एवं नाटककार मकरंद साठे, मलयालम साहित्यकार पॉल जकारिया, कोंकणी लेखक दामोदर मौजो, कन्नड़ लेखक वसुधेंद्र और हिंदी-भोजपुरी के द्विभाषी लेखक गौतम चौबे शामिल हैं। तमिल और मलयालम साहित्य से जुड़े जेयमोहन भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे।

इस विविधता के माध्यम से महोत्सव भारतीय भाषाओं में रचे जा रहे साहित्य को व्यापक पहचान देने और विभिन्न भाषाई समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने का प्रयास करेगा।

महोत्सव के 20वें संस्करण में साहित्य को समकालीन दुनिया के व्यापक सवालों से जोड़ने की तैयारी है। वैश्विक राजनीति, लोकतंत्र, जाति, संघर्ष, पहचान, प्रवासन और इतिहास जैसे विषयों पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे।

विज्ञान और बौद्धिक विमर्श से जुड़े वक्ताओं में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के गणित के प्रोफेसर मार्कस डू सॉटॉय और जीवाश्म विज्ञानी स्टीव ब्रुसेट शामिल हैं। वहीं, मीरा स्याल, प्रबल गुरुंग और जादूगर एवं कहानीकार ड्रमंड मनी-कॉट्सी जैसे नाम प्रदर्शन कला, लोकप्रिय संस्कृति, फैशन और कहानी कहने की दुनिया को साहित्यिक संवाद से जोड़ेंगे।

आयोजकों का मानना है कि अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने से नए विचारों के आदान-प्रदान और समकालीन चुनौतियों को समझने के अवसर बढ़ेंगे।

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टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजय के. रॉय ने कहा कि दो दशक बाद भी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की मूल भावना बरकरार है। यह ऐसा मंच है, जहां विचारों का आदान-प्रदान होता है और नई बातचीत की शुरुआत होती है। उन्होंने साहित्य, कला, संगीत, भोजन, डिजाइन और सांस्कृतिक विरासत के प्रति युवा दर्शकों की भागीदारी को भी महोत्सव की विशेषता बताया।

महोत्सव की सह-संस्थापक और सह-निदेशक नमिता गोखले के अनुसार, पिछले दो दशकों में जयपुर का यह आयोजन एक छोटे साहित्यिक सम्मेलन से विकसित होकर दुनिया के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में अनेक भाषाओं, संस्कृतियों और विचारों को जोड़ने का प्रयास किया गया है।

फेस्टिवल के सह-निदेशक विलियम डैलरिम्पल ने भी 20वें संस्करण को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की विशेषता स्थापित साहित्यकारों के साथ उभरते लेखकों, वैज्ञानिकों, इतिहासकारों, कलाकारों और विचारकों को एक साथ लाना है।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 2027 संस्करण राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक साहित्यिक समुदाय से जोड़ने का अवसर होगा। आयोजकों के मुताबिक, महोत्सव का उद्देश्य केवल पुस्तकों और लेखकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन विचारों और कहानियों को सामने लाना भी है जो समाज, संस्कृति और भविष्य को प्रभावित करते हैं।

20वें संस्करण की पहली वक्ता सूची जारी होने के बाद अब साहित्य प्रेमियों और पाठकों की नजरें आगामी घोषणाओं पर रहेंगी। पांच दिनों तक चलने वाला यह आयोजन जयपुर को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय साहित्य, विचार और सांस्कृतिक संवाद के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत करेगा।

 

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