रसड़ा की राजनीति का मजबूत चेहरा थे उमाशंकर सिंह

रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह की फाइल फोटो - छात्र राजनीति से बसपा के इकलौते विधायक बनने तक का सफर

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की राजनीति में यदि किसी नेता ने अपने दम पर जनाधार बनाया तो उनमें रसड़ा (बलिया) के विधायक उमाशंकर सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। लगातार तीन बार विधायक चुने जाने वाले उमाशंकर सिंह न केवल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रभावशाली नेता थे, बल्कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पूरी पार्टी के एकमात्र विजयी विधायक भी रहे। उनका निधन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति माना गया। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में संघर्ष, संगठन क्षमता और जनसंपर्क के बल पर एक अलग पहचान बनाई।

बलिया जिले के खनवर गांव में 2 जनवरी 1971 को जन्मे उमाशंकर सिंह ने साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर प्रदेश की राजनीति में अपना एक विशिष्ट स्थान बनाया। उनके पिता घुरहू सिंह भारतीय सेना में कार्यरत थे, जिनसे उन्हें अनुशासन, ईमानदारी और देशसेवा की प्रेरणा मिली। छात्र जीवन से ही उनमें नेतृत्व क्षमता दिखाई देने लगी थी। सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया में अध्ययन के दौरान वे छात्रसंघ की राजनीति से जुड़े और वर्ष 1990-91 में छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए। यही वह दौर था जिसने उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव रखी।

छात्र राजनीति के बाद उन्होंने सामाजिक कार्यों के माध्यम से लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई। गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनना, गरीब परिवारों की सहायता करना और युवाओं को साथ लेकर जनहित के कार्य करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन गया। इसी सक्रियता ने उन्हें पूर्वांचल की राजनीति में एक मजबूत जनाधार प्रदान किया।

बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2012 में पहली बार रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2017 में भाजपा की प्रचंड लहर के बावजूद उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी और दूसरी बार विधायक बने। वर्ष 2022 का चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ, जब पूरे उत्तर प्रदेश में बसपा को केवल एक सीट मिली और वह सीट रसड़ा की थी। इस जीत ने उन्हें न केवल बसपा का सबसे प्रमुख चेहरा बनाया, बल्कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया।

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उमाशंकर सिंह की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनका जनता से सीधा जुड़ाव था। वे क्षेत्र के लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध रहने वाले नेता माने जाते थे। चाहे किसी गरीब परिवार की आर्थिक सहायता का मामला हो, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली या पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का प्रश्न हो, वे हर मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनके समर्थकों का मानना था कि वे केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि पूरे वर्ष जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करते थे। यही कारण था कि लगातार तीन चुनावों में उन्हें जनता का विश्वास प्राप्त हुआ।

चुनावी हलफनामे के अनुसार उमाशंकर सिंह आर्थिक रूप से भी काफी संपन्न थे। वर्ष 2022 में उन्होंने लगभग 54.05 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति घोषित की थी, जबकि लगभग 13.55 करोड़ रुपये की देनदारियां भी दर्ज थीं। उनकी संपत्तियों में आवासीय भवन, व्यावसायिक भवन, गैर-कृषि भूमि, महंगे वाहन, बैंक जमा तथा शेयर एवं निवेश शामिल थे। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी पत्नी के नाम पर भी लगभग 25 करोड़ रुपये से अधिक की चल एवं अचल संपत्ति घोषित थी।

व्यावसायिक दृष्टि से भी उनका परिवार सक्रिय था। चुनावी हलफनामे में उल्लेख है कि उनकी पत्नी C.S. Infra Construction Limited की Managing Director थीं। इसी हलफनामे के अनुसार कंपनी में करोड़ों रुपये मूल्य की शेयरहोल्डिंग घोषित की गई थी। हालांकि सार्वजनिक अभिलेखों में कंपनी की परियोजनाओं, वार्षिक कारोबार या व्यावसायिक उपलब्धियों के संबंध में विस्तृत और सत्यापित जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए उनके बारे में इससे आगे कोई दावा करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि परिवार का निर्माण (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र से व्यावसायिक संबंध था और कंपनी में उनका उल्लेखनीय निवेश दर्ज था।

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अपने जीवन के अंतिम वर्षों में उमाशंकर सिंह गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उपचार के लिए उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद बलिया, रसड़ा और पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित अनेक राजनीतिक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

उमाशंकर सिंह का जीवन इस बात का उदाहरण है कि यदि कोई व्यक्ति साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर निरंतर जनता के बीच काम करे, तो वह राजनीति में अपनी अलग पहचान बना सकता है। छात्रसंघ के महामंत्री से लेकर तीन बार विधायक बनने और कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने तक का उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।

 

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