मोबाइल में छिपा है आपकी ग्राम पंचायत का पूरा हिसाब-किताब, जानिए कैसे ‘मेरी पंचायत’ ऐप खोल सकता है विकास कार्यों की सच्चाई
देश में ग्राम पंचायतों में हर वर्ष करोड़ों रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए जाते हैं। गांवों में सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग, सामुदायिक शौचालय, पेयजल व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पंचायत भवन, तालाब, मनरेगा कार्य, प्रधानमंत्री आवास, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से बड़ी राशि भेजी जाती है। लेकिन अक्सर ग्रामीणों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर उनकी पंचायत को कितना पैसा मिला, किन कार्यों के लिए स्वीकृति मिली, कितना खर्च हुआ और क्या वास्तव में वे कार्य धरातल पर पूरे भी हुए या नहीं? पहले इन सवालों के जवाब पाने के लिए सूचना का अधिकार (RTI), सरकारी कार्यालयों के चक्कर या जनप्रतिनिधियों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब भारत सरकार का ‘मेरी पंचायत’ (Meri Panchayat) मोबाइल ऐप इस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और आम नागरिक के लिए सुलभ बनाने का प्रयास कर रहा है।
पंचायती राज मंत्रालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा विकसित यह ऐप डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को उनकी ग्राम पंचायत के प्रशासन, योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी सीधे उनके मोबाइल तक पहुँचाना है। यह ऐप eGramSwaraj, ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), AuditOnline और अन्य सरकारी डिजिटल प्रणालियों से उपलब्ध सूचनाओं को एक स्थान पर उपलब्ध कराने का माध्यम है। यदि संबंधित पंचायत द्वारा रिकॉर्ड समय पर अपडेट किए जाते हैं, तो कोई भी नागरिक अपनी पंचायत के विकास कार्यों, वित्तीय जानकारी और योजनाओं की स्थिति देख सकता है।
ऐप के माध्यम से ग्रामीण यह जान सकते हैं कि उनकी ग्राम पंचायत में किस कार्य के लिए कितनी धनराशि स्वीकृत हुई, कार्य कब स्वीकृत हुआ, किस एजेंसी या विभाग द्वारा कराया जा रहा है, उसकी वर्तमान प्रगति क्या है और कई मामलों में कार्य स्थल की जियो-टैग फोटो भी उपलब्ध होती है। इसके अलावा ग्राम पंचायत का वार्षिक बजट, आय-व्यय का विवरण, पंचायत की परिसंपत्तियाँ (Assets), ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), ग्राम सभा की बैठकों की जानकारी, विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों की सूची तथा पंचायत स्तर पर लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय भी देखे जा सकते हैं। इससे ग्रामीणों को पहली बार अपने गांव के विकास का डिजिटल रिकॉर्ड देखने का अवसर मिलता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ऐप केवल जानकारी देखने तक सीमित नहीं है। यदि किसी गांव में सड़क अधूरी बनी है, नाली टूट चुकी है, हैंडपंप खराब है, स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही, सार्वजनिक स्थान पर गंदगी है, सरकारी निर्माण कार्य निम्न गुणवत्ता का है या किसी योजना में अनियमितता दिखाई देती है, तो नागरिक ऐप के माध्यम से संबंधित विषय पर सुझाव या शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत के साथ फोटो और स्थान (लोकेशन) भी जोड़ा जा सकता है, जिससे संबंधित विभाग तक वास्तविक स्थिति पहुँचे। शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी स्थिति भी ट्रैक की जा सकती है।
हालांकि केवल ऐप पर दिखाई देने वाली जानकारी को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। कई बार पंचायतों द्वारा रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं किए जाते, कुछ स्थानों पर तकनीकी त्रुटियों के कारण डेटा अधूरा दिखाई देता है और कहीं-कहीं पुराने रिकॉर्ड भी प्रदर्शित होते हैं। इसलिए यदि किसी विकास कार्य में गड़बड़ी का संदेह हो तो ऐप पर उपलब्ध जानकारी का जमीनी सत्यापन करना आवश्यक है। यही कारण है कि सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit), स्थानीय नागरिकों की भागीदारी और स्वतंत्र पत्रकारिता की भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है।
लोकतंत्र की सबसे मजबूत इकाई ग्राम पंचायत है। जब गांव का प्रत्येक नागरिक अपने मोबाइल से पंचायत का बजट, विकास कार्य और खर्च देख सकेगा, सवाल पूछ सकेगा और शिकायत दर्ज कर सकेगा, तभी वास्तविक पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित होगी। ‘मेरी पंचायत’ ऐप केवल एक मोबाइल एप्लिकेशन नहीं, बल्कि ग्राम स्वराज की दिशा में डिजिटल भागीदारी का एक महत्वपूर्ण कदम है। अब यह ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर निर्भर है कि इस तकनीक का उपयोग केवल औपचारिकता तक सीमित रहे या इसे वास्तव में सुशासन और पारदर्शिता का प्रभावी माध्यम बनाया जाए।