Jio IPO Day 3: 1 करोड़ आवेदन का रिकॉर्ड, 18.6 गुना सब्सक्रिप्शन
- बिजनेस न्यूज़ | The Newswala.com | 23 अक्टूबर 2026
देश के शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। ₹30,213 करोड़ के इस मेगा IPO को लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। 23 अक्टूबर 2026 को सब्सक्रिप्शन के तीसरे और अंतिम दिन इस इश्यू को एक करोड़ से ज्यादा आवेदन मिले, जो निवेशकों की भागीदारी के लिहाज से एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
IPO में संस्थागत निवेशकों ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। उपलब्ध सब्सक्रिप्शन आंकड़ों के अनुसार अलग-अलग कैटेगरी की स्थिति इस प्रकार रही:
क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB)
बड़े संस्थागत निवेशक
56.34x
बड़े व्यक्तिगत और अन्य निवेशक
13.88x
आम व्यक्तिगत निवेशक
2.66x
23 अक्टूबर को इश्यू बंद होने के बाद प्रकाशित अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़े।
₹30,213 करोड़ जुटाने उतरी कंपनी
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO का कुल आकार ₹30,213 करोड़ रखा गया था। कंपनी ने प्रति शेयर ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड तय किया था। इस इश्यू में 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए गए और इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं था।
कंपनी के मुताबिक, IPO से मिलने वाली रकम में से अधिकतम ₹27,500 करोड़ का इस्तेमाल उसकी टेलीकॉम सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को चुकाने या कम करने के लिए किया जाना है। बाकी रकम का उपयोग सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा
कब आएगा अलॉटमेंट और शेयरों की लिस्टिंग?
निवेशकों के लिए IPO से जुड़ी प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
| विवरण | तारीख / जानकारी |
|---|---|
| IPO खुलने की तारीख | 21 अक्टूबर 2026 |
| IPO बंद होने की तारीख | 23 अक्टूबर 2026 |
| संभावित अलॉटमेंट | 26 अक्टूबर 2026 |
| संभावित शेयर लिस्टिंग | 28 अक्टूबर 2026 |
| प्राइस बैंड | ₹1,065–₹1,119 |
| न्यूनतम लॉट | 12 शेयर |
IPO के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) को लेकर भी निवेशकों के बीच चर्चा रही। इश्यू के अंतिम दिन ग्रे मार्केट में लगभग 21% प्रीमियम की रिपोर्ट सामने आई थी। हालांकि, GMP अनौपचारिक बाजार का संकेतक है और इससे वास्तविक लिस्टिंग मूल्य या मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती।
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में एक करोड़ से ज्यादा आवेदन मिलना भारतीय पूंजी बाजार में आम निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग ने भी इस इश्यू को चर्चा में बनाए रखा। हालांकि, केवल ज्यादा सब्सक्रिप्शन या GMP देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है। कंपनी की वित्तीय स्थिति, मूल्यांकन और दीर्घकालिक संभावनाओं का आकलन भी जरूरी है।