गोरखपुर। जन्मदिन की पार्टी के बाद सड़क पर मारपीट और बीच-बचाव करने पहुंचे पुलिसकर्मियों से हाथापाई का मामला एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों को भारी पड़ गया। संस्थान प्रशासन ने अनुशासनहीनता के आरोप में छह इंटर्न समेत 12 रेजीडेंट डॉक्टरों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें आठ डॉक्टरों को 30 दिन और चार को 10 दिन के लिए निलंबित किया गया है। यह फैसला संस्थान की आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।
पार्टी खत्म होने के बाद सड़क पर भिड़े छात्र
जानकारी के मुताबिक, 19 सितंबर की देर रात एम्स के कई एमबीबीएस छात्र कैंट क्षेत्र स्थित एक होटल में जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने पहुंचे थे। पार्टी समाप्त होने के बाद कुछ छात्र पैडलेगंज के पास सड़क पर आ गए। वहां उनके बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई।
इसी दौरान रात करीब डेढ़ बजे कैंट थाने के दो सिपाही वहां से गुजर रहे थे। छात्रों को आपस में उलझते देखकर उन्होंने बीच-बचाव कर विवाद शांत कराने की कोशिश की। आरोप है कि दोनों सिपाही सादे कपड़ों में थे और छात्रों ने उनके साथ भी हाथापाई कर दी।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस चौकी को सूचना दी गई। इसके बाद मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई करते हुए आठ छात्रों को हिरासत में लिया और थाने ले गए। अगले दिन सभी का शांतिभंग की आशंका में चालान किया गया। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत से उन्हें जमानत मिल गई।
सीसीटीवी फुटेज भी जांच में शामिल
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, फुटेज में कुछ छात्रों के हेलमेट से पुलिसकर्मियों पर हमला करने की बात सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स प्रशासन ने भी अपने स्तर पर जांच समिति गठित की।
समिति ने घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की। उसकी रिपोर्ट के आधार पर 12 रेजीडेंट डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। इनमें छह इंटर्न भी शामिल हैं। प्रशासन ने आठ डॉक्टरों को एक महीने और चार डॉक्टरों को 10 दिन के लिए निलंबित करने का निर्णय लिया।
हॉस्टल के नियम भी किए गए सख्त
घटना के बाद एम्स प्रशासन ने विद्यार्थियों के हॉस्टल से आने-जाने की व्यवस्था को लेकर भी सख्ती की थी। जारी निर्देशों के अनुसार, विद्यार्थियों को रात 10 से 11 बजे के बीच वार्डन के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी। रात 11 बजे के बाद बिना अनुमति हॉस्टल से बाहर जाने पर रोक लगाई गई थी।
इसके अलावा, संबंधित विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी संस्थान बुलाकर मामले की जानकारी दी गई। प्रशासन की कार्रवाई से स्पष्ट है कि संस्थान परिसर से बाहर विद्यार्थियों के आचरण और अनुशासन से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है।