पथरदेवा में 5.79 करोड़ के 20 विकास कार्यों पर टेंडर विवाद, जांच के बाद ईओ के निलंबन की संस्तुति
देवरिया। जिले की पथरदेवा नगर पंचायत में 5.79 करोड़ रुपये के 20 विकास कार्यों की निविदा प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। आठ अक्टूबर की रात हुए विवाद के बाद मामला पुलिस और प्रशासन तक पहुंचा। दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे दर्ज कराए गए। अब टेंडर से जुड़े दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी (ईओ) हिमांशु सिंह के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी है। हालांकि, निलंबन की अंतिम कार्रवाई शासन स्तर पर होनी है। 16 अक्टूबर तक टेंडर खुलने की अगली तारीख भी स्पष्ट नहीं थी।
सीआरओ और वरिष्ठ कोषाधिकारी ने की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने जांच के लिए मुख्य राजस्व अधिकारी चंद्रेश कुमार और वरिष्ठ कोषाधिकारी अतुल कुमार पांडेय की दो सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने टेंडर से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की और अधिशासी अधिकारी से पूछताछ की।
जांच के प्रमुख बिंदुओं में निविदा अपलोड करने की अंतिम तारीख बढ़ाने का कारण और निर्धारित समय पर टेंडर नहीं खोले जाने की वजह शामिल थी। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपे जाने के बाद ईओ के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई।
यह संस्तुति अपने आप में निलंबन का अंतिम आदेश नहीं है। इस पर शासन का निर्णय होना बाकी है।
तीन योजनाओं के तहत होने थे 20 विकास कार्य
नगर पंचायत में प्रस्तावित कार्य तीन योजनाओं के अंतर्गत शामिल हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना के तहत 15 कार्यों पर 3 करोड़ 80 लाख 33 हजार रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।
सीवरेज एवं जलनिकासी योजना के तहत एक कार्य की अनुमानित लागत 49 लाख 13 हजार रुपये रखी गई है। वहीं, आकांक्षी नगर योजना के चार कार्यों के लिए 1 करोड़ 49 लाख 65 हजार रुपये का आगणन तैयार किया गया है।
इन तीनों योजनाओं के 20 कार्यों की कुल अनुमानित लागत 5 करोड़ 79 लाख 11 हजार रुपये है। निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं होने से इन कार्यों के लिए ठेकेदारों के चयन और आगे की प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी हुई है।
टेंडर की तारीखों में बदलाव के बाद बढ़ा विवाद
11 सितंबर को प्रकाशित अल्पकालीन ई-टेंडर में निविदा अपलोड करने की अंतिम तारीख पांच अक्टूबर निर्धारित थी। शुरुआत में टेंडर छह अक्टूबर को शाम चार बजे खोले जाने थे। बाद में नगर पंचायत अध्यक्ष के आदेश के क्रम में निविदा अपलोड करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर सात अक्टूबर कर दी गई और टेंडर खोलने के लिए आठ अक्टूबर को शाम चार बजे का समय निर्धारित हुआ।
इसी दौरान आठ अक्टूबर की रात विवाद हो गया। इसके बाद निविदा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। प्रशासनिक जांच में तारीख बढ़ाने और टेंडर खोलने में हुई देरी के कारणों की पड़ताल की गई।
दोनों पक्षों की ओर से दर्ज हैं मुकदमे
विवाद के बाद अधिशासी अधिकारी हिमांशु प्रताप सिंह के साथ कथित मारपीट और उन्हें जबरन ले जाने की कोशिश के आरोप सामने आए। नगर पंचायत अध्यक्ष की ओर से दी गई तहरीर में ठेकेदार धीरज सिंह और अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए।
दूसरी ओर, ठेकेदार धीरज सिंह की तहरीर पर ईओ, नगर पंचायत अध्यक्ष और अन्य लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों की शिकायतों पर अलग-अलग मामले दर्ज किए गए और आरोपों की जांच शुरू की गई। 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रकरण में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों को जांच और न्यायिक प्रक्रिया में साबित होना बाकी है। इसलिए किसी भी पक्ष को दोषी मानने से पहले जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।
अब शासन के फैसले और टेंडर प्रक्रिया पर नजर
पथरदेवा नगर पंचायत के इस मामले में अब दो महत्वपूर्ण सवाल हैं—ईओ के निलंबन की संस्तुति पर शासन क्या निर्णय लेता है और 20 विकास कार्यों की निविदा प्रक्रिया कब आगे बढ़ती है।
इन कार्यों का उद्देश्य नगर पंचायत क्षेत्र में विकास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णय महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल टेंडर खुलने की नई तारीख की पुष्टि नहीं हुई है। आगे की स्थिति प्रशासनिक निर्णय, पुलिस जांच और शासन की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।