देवरिया। मौसम में बदलाव की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की फसल कटाई के दौर में है, ऐसे में तेज हवाओं और बेमौसम बारिश से खेतों में खड़ी फसल के साथ कटाई के बाद खुले में रखी उपज को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसे देखते हुए जिला कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी है।
जिला कृषि अधिकारी उदय शंकर सिंह ने किसानों को तैयार धान की कटाई कर सुरक्षित स्थान पर रखने, खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था करने और मौसम की स्थिति को देखते हुए कृषि कार्य करने की सलाह दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की 28 अक्टूबर को जारी चेतावनी में पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए 29 और 30 अक्टूबर को बहुत भारी बारिश तथा गरज-चमक की संभावना जताई गई है। किसानों को अपने क्षेत्र का ताजा मौसम पूर्वानुमान भी देखते रहना चाहिए।
तैयार धान की फसल को सुरक्षित रखने की सलाह
कृषि विभाग के अनुसार, जिन खेतों में धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है, वहां कटाई के बाद उपज को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। खेत में कटी हुई फसल को खुले में छोड़ने से बचें। यदि तत्काल सुरक्षित स्थान पर रखना संभव नहीं है, तो उसे तिरपाल से ढककर बारिश से बचाएं।
जिन खेतों में धान पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है, वहां फसल को गिरने से बचाने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। तेज हवा के साथ बारिश होने पर फसल गिर सकती है, जिससे कटाई और मड़ाई में परेशानी हो सकती है।
मक्का, मूंगफली और गन्ने पर भी ध्यान दें
कृषि विभाग ने मक्का की पकी बालियों को तोड़कर सुरक्षित और छायादार स्थान पर रखने की सलाह दी है। खेतों में पानी जमा होने की आशंका को देखते हुए जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखना जरूरी है।
मूंगफली की फसल में पानी भरने से फलियों के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में खेत से अतिरिक्त पानी निकालें और मिट्टी की स्थिति खुदाई के अनुकूल होने तक मूंगफली की खुदाई स्थगित रखें। वहीं, तेज हवा से गन्ने की फसल गिर गई हो तो उसे सहारा देकर बांधने की सलाह दी गई है।
रबी की बुवाई में भी बरतें सावधानी
बारिश की संभावना को देखते हुए खेतों में अनावश्यक सिंचाई से बचने और पहले से बोई गई रबी फसलों में जलभराव नहीं होने देने पर जोर दिया गया है। खेतों में पानी जमा रहने से अंकुरित फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
किसानों को मौसम की ताजा जानकारी के आधार पर कृषि कार्यों की योजना बनानी चाहिए। बारिश के दौरान खेतों में उर्वरक या कीटनाशक का छिड़काव करने से बचें और जरूरत पड़ने पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
किसानों के लिए अगले दो दिन अहम
धान की कटाई, मड़ाई और भंडारण के लिहाज से आने वाले दिन महत्वपूर्ण हो सकते हैं। किसानों को अपनी फसल की स्थिति के अनुसार सावधानी बरतनी होगी, ताकि मेहनत से तैयार उपज को नुकसान से बचाया जा सके।
मौसम संबंधी चेतावनियों में बदलाव संभव है। इसलिए किसान भारत मौसम विज्ञान विभाग और जिला प्रशासन की ओर से जारी ताजा सूचनाओं पर नजर रखें। खेतों में जलनिकासी और उपज के सुरक्षित भंडारण की तैयारी पहले से करना नुकसान का जोखिम कम करने में मददगार हो सकता है।